New Guideline: घर में ही मनेगा गणेशोत्सव, पंडालों पर रोक, शादी में सिर्फ 20 लोगों को अनुमति

New Guideline: घर में ही मनेगा गणेशोत्सव, पंडालों पर रोक, शादी में सिर्फ 20 लोगों को अनुमति

भोपाल| मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर नई गाइडलाइन बनाई गई है| प्रदेश में इस बार सार्वजनिक रूप से गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) मनाने पर रोक रहेगी। गणेश पंडालों को अनुमति नहीं दी जाएगी, घरों में ही इस बार भगवान श्री गणेश की पूजा होगी। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने इस संबंध में जानकारी दी|

गृह मंत्री डॉ मिश्रा ने मूर्तिकारों से अनुरोध किया है कि छोटी मूर्ति ही बनाएं| इसके साथ ही विसर्जन को लेकर भी नई गाइडलाइन बनाई गई है। इसके अलावा वैवाहिक कार्यक्रम को लेकर भी नहीं गाइडलाइन लागू होगी। इसके अनुसार अब वर पक्ष और वधू पक्ष के 10-10 लोग ही शादी में शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा अंतिम संस्कार में भी 20 से अधिक लोग के शामिल होने पर रोक रहेगी। अंतिम संस्कार में भी सिर्फ 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति होगी|

घर में मनेगी ईद, शादी में 20 जन्मदिन में 10 लोगों को अनुमति
कोरोना के चलते ईद के सामूहिक कार्यक्रम नही होंगे| इस बार लोग अपने घरों में ही ईद मनाएंगे| वहीं धार्मिक स्थलों मे एक बार मे पांच से ज्यादा लोगों को जाने की अनुमति नही होगी| इन नियमों को पालन कराने के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं| शादी, सगाई आदि में दोनों पक्षों के 10-10 व्यक्ति से अधिक सम्मिलित नहीं होंगे। जन्मदिन आदि उत्सवों में 10 से अधिक व्यक्ति शामिल नहीं होंगे। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए घर पर ही आगामी त्यौहार मनाये जाएंगे। देव प्रतिमा घर पर ही स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएंगी। सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिमा स्थापित करने, त्योहार मनाने की अनुमति नहीं होगी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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