कैसे निकले राज्यपाल राजभवन से बाहर, किसने उड़ाई नियमों की धज्जियां

कैसे निकले राज्यपाल राजभवन से बाहर, किसने उड़ाई नियमों की धज्जियां

भोपाल

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन (governor lalji tondon) मंगलवार से दस दिन के दौरे पर लखनऊ (lucknow) चले गए। अब वे 19 तारीख को वापस आएंगे। आमतौर पर राज्यपाल का अपने गृह राज्य में जाना एक सामान्य बात होती है, लेकिन इस समय स्थितियां बदली हुई है।

राजभवन में 12 कोरोना पॉजिटिव (corona positive)) मरीज निकल चुके हैं और भारत सरकार (Indian government) और आईसीएमआर (ICMR) के कोविड-19 (covid-19) के दिशा निर्देशों के अनुसार राजभवन इस समय कंटेनमेंट एरिया है। कंटेनमेंट एरिया होने के नाते राजभवन में ना तो कोई जा सकता है और न ही वहां से कोई बाहर आ सकता है। इतना ही नहीं वहां रहने वाले हर व्यक्ति की सतत निगरानी की जाती है और हर सात दिन बाद उसका टेस्ट करके यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि कहीं वह कोरोना पॉजिटिव तो नहीं हो गया। यदि 21 दिन तक वहां यथास्थिति रहती है तो उसके बाद फिर उस क्षेत्र को क्वारेंटाइन मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया जाता है। लेकिन बीते बारह दिनों में बारह कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद कायदे से राजभवन कंटेनमेंट एरिया है। पहले तो राज्यपाल के ओएसडी मनोहर दुबे ने इस क्षेत्र को कंटेनमेंट फ्री एरिया घोषित कर दिया और जब बात बाहर आई तो जिला प्रशासन ने साफ कह दिया कि हमने इसे कंटेनमेंट फ्री एरिया घोषित नहीं किया। फिर सवाल ये उठता है कि आखिरकार राज्यपाल राजभवन से बाहर निकले कैसे। कहीं महामहिम को धोखे में रखकर उनसे जानबूझकर नियमों की धज्जियां तो नहीं उड़वाई गयी। अब इसका जिम्मेदार कौन है ये एक बड़ा सवाल है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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