मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज और नर्सिंग काउंसिल का गठजोड़ हमेशा चर्चा में रहता है, प्रदेश के फर्जी नर्सिंग कॉलेज का मामला तो देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच करवाने को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि जांच करवाना अनिवार्य हैं, इस सबके बीच एक और घोटाला सामने आया है।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने न्मध्य प्रदेश के नर्सिंग काउंसिल के अधिकारियों पर बड़ा आरोप लगाते हुए सीधी जिले के आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की निर्माणाधीन बिल्डिंग में 120 सीटों की मान्यता दिए जाने पर सवाल उठाये हैं और इसकी सीबीआई से उच्च स्तरीय जाँच कराने की मांग की है, एनएसयूआई ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित संभी संबंधित अधिकारियों और विभागों में की है।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश के सीधी जिले की कुसमी तहसील के भादौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता कई सवाल खड़े करती है, उन्होंने कहा उपलब्ध दस्तावेजों और मौके की स्थिति के आधार पर कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया की गंभीरता से जांच आवश्यक है सीधी के भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनूप मिश्रा एवं बहू बीना मिश्रा से द्वारा निर्माणाधीन बिल्डिंग में खोले गए कॉलेज को आखिर मान्यता कैसे मिल गई?
सांसद पुत्र के नर्सिंग कॉलेज को नियम विरुद्ध मान्यता के आरोप
रवि परमार ने आरोप लगाया है कि आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज का संचालन अनूप मिश्रा , बीना मिश्रा , वैष्णवी मिश्रा , शरद पाठक , राजेश सिंह चौहान रामजियावन पटेल और रीवा के संजय द्विवेदी द्वारा सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति सीधी के माध्यम से किया जा रहा हैं ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सांसद पुत्र और उनके करीबियों को नियम विरुद्ध नर्सिंग कॉलेज की मान्यता प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन एवं मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल रजिस्ट्रार और अधिकारियों के नियमों को ताक पर रखकर काम किया ।
NSUI का सवाल, निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता कैसे?
NSUI की शिकायत के अनुसार कॉलेज द्वारा B.Sc. Nursing की 60 और GNM Nursing की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया गया था। प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है कि जिस समय कॉलेज की मान्यता की प्रक्रिया हुई, उस समय कॉलेज का भवन निर्माणाधीन था और वर्तमान में भी निर्माणाधीन हैं । इसके बावजूद निरीक्षण दल द्वारा कॉलेज को मान्यता के लिए उपयुक्त पाया गया। रवि परमार ने सवाल किया कि यदि निरीक्षण के समय भवन, प्रयोगशालाएं और अन्य आवश्यक संसाधन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थे, तो निरीक्षण दल ने किस आधार पर कॉलेज को मान्यता के योग्य पाया?
फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्र भी जांच के घेरे में
रवि परमार ने कॉलेज द्वारा प्रस्तुत किए गए फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि शैक्षणिक फैकल्टियों के अनुभव प्रमाण-पत्र फर्जी हैं। इसलिए CBI से मांग की गई है कि प्रत्येक प्रमाण-पत्र को संबंधित अस्पताल, संस्था अथवा नियोक्ता से सीधे सत्यापित कराया जाए। यदि कोई प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है तो उसके आधार पर मान्यता प्राप्त करने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।
मान्यता देने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच हो
NSUI ने कहा कि जांच केवल कॉलेज संचालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों, निरीक्षण दल के सदस्यों और मान्यता प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक अधिकारी की भूमिका की जांच होना आवश्यक है। यह भी जांच का विषय है कि निरीक्षण के दौरान कॉलेज में वास्तव में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध थीं और निरीक्षण रिपोर्ट में उनका क्या उल्लेख किया गया।








