मंदिरों में सेनेटाइजर के प्रयोग पर जताई आपत्ति, पुजारियों ने गृहमंत्री को सौंपा ज्ञापन

मंदिरों में सेनेटाइजर के प्रयोग पर जताई आपत्ति, पुजारियों ने गृहमंत्री को सौंपा ज्ञापन

भोपाल

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 8 जून से सभी धार्मिक स्थल (Religious Place) खुलने जा रहे हैं। सरकार ने सभी तैयारियां कर ली है। इसके लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। गाइडलाइन (Guideline) के मुताबिक धार्मिक स्थलों पर सैनिटाइजर मशीन (Sanitizer Machine) लगाई जाएगी, तभी श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा। खुद को सैनेटाइज करने के बाद ही भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे। लेकिन इसे लेकर कुछ संस्थाओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है|

संस्कृति बचाओ मंच व पुजारियों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष पं.चंद्रशेखर तिवारी ने का कहना है कि मंदिरों में सैनिटाइजर का उपयोग हम लोग नहीं करेंगे, क्योंकि उसमें 64 परसेंट से ज्यादा अल्कोहल होता है। और शराब से हाथ धोकर भक्त भी अपवित्र होगा और मंदिर भी। उन्होने गृह मंत्री से सैनेटाइजर की बजाय मंदिरों में हाथ धोने वाली पानी की टंकी और वॉशबेसिन लगवाए जाने की मांग की है। इन्होने गृहमंत्री ने निवेदन किया कि शासन स्तर पर यह कार्य करवाने का कष्ट करें जिसे लेकर नरोत्तम मिश्सानेकहा कि वे अपने स्तर पर चर्चा करके शीघ्र इसका निराकरण करेंगे। इस प्रतिनिधि मंडल में पुजारी संघ के अध्यक्ष नरेंद्र दीक्षित, पं.कपिल शर्मा, पं.रामकिशोर वैदिक, पं.रामनारायण तिवारी और पंं.देवेन्द्र तिवारी शामिल थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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