ऑनलाइन होगा पटवारी भर्ती का डाटा, राज्य स्तर पर होगी काउंसलिंग

ऑनलाइन होगा पटवारी भर्ती का डाटा, राज्य स्तर पर होगी काउंसलिंग

भोपाल। पटवारी भर्ती में हो रही गड़बड़ी को लेकर राजस्व मंत्री गोविंद सिंह ने अधिकारियों के सामने पटवारी भर्ती के वेटिंग वाले उम्मीदवारों की समस्याओं को सुना। राजस्व मंत्री ने पटवारी भर्ती में हो रही गड़बड़ी को रोकने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इसके बाद अधिकारियों ने भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए अब तक की भर्ती और खाली पदों की जानकारी को ऑनलाइन किए जाने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही अब जो भी भर्ती होगी वह राज्य स्तर पर होगी, जिससे भर्ती में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हो पाए। वहीं पटवारी भर्ती परीक्षा में रिश्वत लिए जाने का ऑडियो हाल ही में वायरल हुआ था। इसको लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। इसके बाद इस मामले में भी जांच के आदेश हो गए हैं। राजस्व मंत्री के ओएसडी कमल नागर ने जांच के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि पटवारी भर्ती के लिए पात्रता परीक्षा वर्ष 2017 में हुई थी। परीक्षा के बाद 18 महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया जाना था, लेकिन जिला स्तर पर हो रही पटवारी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के चलते वेटिंग वाले अयर्थी अब भी परेशान हो रहे हैं। खाली पदों को भरे जाने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के ऊपर है। इधर, राजस्व विााग की भर्ती पर वेटिंग वाले उम्मीदवार फर्जीबाड़े के आरोप लगा रहे हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को राज्य स्तर पर किया जाना था, लेकिन अधिकारी गड़बड़ी करने के लिए भर्ती को जिला स्तर पर कर रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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