प्रतिबन्ध के बाद भी दुकान खोलकर धौंस जमाने वालों का पुलिस ने निकाला जुलूस

प्रतिबन्ध के बाद भी दुकान खोलकर धौंस जमाने वालों का पुलिस ने निकाला जुलूस

दमोह। लॉक डाउन का पालन न करते हुए जबरन दुकान खोलने वालों को पुलिस ने सबक सिखाया| दुकानें खोलकर पुलिस को धौंस दिखाने वाले दुकानदारों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने धारा 188 के तहत कार्रवाई की, साथ ही जुलूस की शक्ल में पैदल चलाकर कोतवाली थाना लाया गया।

दरअसल, प्रशासन ने आवश्यक सामग्री की खरीदारी के लिए दोपहर 12 से 3 बजे तक का समय निर्धारित कि या है। इस दौरान केवल राशन और सब्जी से जुड़ी आवश्यक सामग्री की खरीदारी की दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई है। शनिवार दोपहर को पुलिस को सूचना मिली कि आवश्यक सामग्री खरीदने की छूट के दौरान कुछ लोग जूता, चप्पल की दुकान खोलकर बैठे हुए हैं। जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को दुकानें बंद करने को कहा| लेकिन लोगों ने पुलिस की बात नहीं मानी| बाद में पांच युवकों को जुलूस की शक्ल में पैदल चलाकर कोतवाली थाना लाया गया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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