ज्यादा का लालच देकर ठगने वालों की अब खेर नहीं, भोपाल पुलिस दरबार लगाकर सुनेगी शिकायतें

ज्यादा का लालच देकर ठगने वालों की अब खेर नहीं, भोपाल पुलिस दरबार लगाकर सुनेगी शिकायतें

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| ज्यादा लाभ का प्रलोभन देकर निवेशकों से ठगी करने वाली फर्जी कंपनियों और लोगों की मेहनत की कमाई को धोखा देकर चपत लगाने वालों की अब खेर नहीं| भोपाल जोन के एडीजी उपेन्द्र जैन (ADG Upendra Jain) ने जिले के समस्त थाना प्रभारियों को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं|  एडीजी (ADG) के निर्देश पर 15 दिसम्बर को सभी थानों (Police Station) में सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक आम जनों की शिकायतें सुनी जाएंगी| शिकायतें दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जायेगी|

जिले के सभी थानों में थाना प्रभारी धोखाधड़ी के शिकार पीड़ितों की शिकायतें सुनेंगे| जिसमे ज्यादा लाभ का प्रलोभन देकर निवेश करवाने वाली कंपनियों (चिटफंड) द्वारा धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें ,या किसी व्यक्ति द्वारा बहुत अधिक रिटर्न ( सालाना 11% से अधिक) के वादे पर इन्वेस्टमेंट किया गया हो और उनको लगता है कि उनके साथ धोखाधड़ी हो सकती है, या कोई व्यक्ति इस तरह की कंपनियों के बारे में जानकारी रखता हो। ऐसी शिकायतें सुनी जाएंगी|

इसके अलावा सायबर अपराध संबंधी शिकायतें जैसे कि फ़ोन पर OTP पूछकर बैंक खाता से रुपया निकाल लेना, ATM कार्ड बदल कर रुपया निकाल लेना इत्यादि। साथ ही ऐसी शिकायतें जिसमें पैसा लेकर ज़मीन, प्लॉट, घर, फ्लैट देने का वादा करके धोखा दिया गया हो| शिकायत के लिए लोग सम्बंधित दस्तावेज के साथ सम्बंधित थाने में पहुँच सकते हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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