राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बैतूल में कहा ‘आदिवासी हैं, वनवासी नहीं’: उमंग सिंघार का आरोप “भाजपा आदिवासी समाज की पहचान बदलने पर अड़ी है”

मध्यप्रदेश दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि वे आदिवासी हैं, वनवासी नहीं। उनके इस बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष ने निशाना साधते हुए कहा है कि आदिवासी समाज की अस्मिता, इतिहास और अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर भाजपा को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
Umang Singhar

मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बैतूल में जनजातीय समाज को लेकर की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि “आखिरकार महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने सार्वजनिक रूप से माना कि भाजपा ‘आदिवासियों’ को ‘वनवासी’ कहकर अन्याय कर रही है।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि जब देश की प्रथम नागरिक स्वयं इस बात को स्वीकार कर रही हैं तो भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठन आदिवासी समाज को ‘वनवासी’ कहकर संबोधित करने पर जोर क्यों देते हैं। उन्होंने कहा कि “आदिवासी सिर्फ एक शब्द नहीं है बल्कि इतिहास, संस्कृति और जल-जंगल-जमीन से जुड़ी पहचान है। यह संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक अस्मिता का प्रतीक है।”

राष्ट्रपति ने कहा “वनवासी नहीं, जनजातीय समाज आदिवासी है”

मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आदिवासी पहचान को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। बैतूल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिए गए बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समुदाय को भले ही कोई ‘वनवासी’ कहे लेकिन वास्तव में वे ‘आदिवासी’ हैं। उन्होंने कहा कि “”जनजातीय समुदाय को भले कोई वनवासी कहे लेकिन वास्तव में वे आदिवासी हैं। ये आदिवासी है जो सृष्टि के आरंभ से ही धरती पर रहते हैं और उनकी जीवनशैली आध्यात्मिकता से भरी है। वो शांति से जीना जानते हैं हिंसा से दूर रहते हैं। हम आदिमकाल में जैसे थे आज भी वैसे ही है। जैसे गिली मिट्टी जैसे बनाओ वैसे बनते हैं। हम आदिवसी प्रकृति और पंचतत्व की पूजा करते हैं।”

उमंग सिंघार ने बीजेपी पर लगाया पहचान बदलने का आरोप 

इसके बाद उमंग सिंघार ने बीजेपी को आदिवासी समाज को “वनवासी” कहने पर घेरा है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति जी स्वयं इस सत्य को मान रही हैं तो भाजपा और उसके वैचारिक संगठन आदिवासी समाज की पहचान बदलने पर क्यों अड़े हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “दिवासी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी अस्मिता है। आदिवासी समाज अपनी पहचान पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।”

कांग्रेस और बीजेपी में इस मुद्दे पर तनातनी

बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह समेत कई भाजपा नेताओं ने आदिवासियों को बार-बार ‘वनवासी’ कहकर संबोधित किया है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता राम माधव ने स्पष्ट रूप से कहा था कि “हम उन्हें वनवासी कहते हैं, आदिवासी नहीं।” इसपर अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने भी पहले ही कहा है कि ‘आदिवासी’ और ‘वनवासी’ में बहुत बड़ा फर्क है। आदिवासी इस धरती के आदि निवासी और मालिक हैं, जबकि ‘वनवासी’ शब्द उन्हें सिर्फ जंगलों तक सीमित कर देता है जिससे जंगलों के खत्म होने पर उनकी पहचान भी खत्म हो जाएगी। राष्ट्रपति के बयान के बाद अब एक बार फिर से ये मुद्दा सुर्खियों में आ गया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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