भोपाल में दुर्गा उत्सव की गाइडलाइन का विरोध, पुलिस ने भांजी लाठियां

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| कोरोना काल (Corona Period) में इस बार दुर्गा उत्सव (Durga Utsav) पाबंदियों के साथ मनाया जाएगा| सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का भोपाल (Bhopal) में विरोध हो गया| बड़ी संख्या में रोशनपुरा चौराहे पर रविवार दोपहर को विरोध प्रदर्शन कर रहे भवानी संगठन के कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठियां बरसा दी| पुलिस (Police) ने कार्यकर्ताओं को पीछा कर पीटा| इस दौरान कइयों को हिरासत में भी लिया गया है|

दरअसल, कोरोना के चलते सरकार ने दुर्गा प्रतिमा की अधिकतम ऊंचाई 6 फीट और पंडाल का साइज भी तय किया है| प्रशासन गाइडलाइन को सख्ती से पालन करा रहा है| इसके विरोध में रविवार को जय भवानी संगठन के कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर बड़ा प्रदर्शन किया| शुरुआत में सिर्फ नारेबाजी हो रही थी| लेकिन इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस से गहमा गहमी हो गई|

पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसा दी| पुलिस के एक्शन को देख भीड़ तीतर बितर हो गई| लेकिन पुलिस ने पीछा कर कार्यकर्ताओं को पीटा और जो हाथ लगे उन्हें हिरासत में ले लिया| पुलिस की कार्रवाई पर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है|

कांग्रेस ने सीएम शिवराज को घेरा
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट कर सरकार पर हमला बोला है| कांग्रेस ने ट्वीट कर लिखा ‘शिवराज के ख़िलाफ़ हिन्दुओं का प्रदर्शन, शिवराज ने हिन्दुओं पर बरसाई लाठियाँ ; भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर दुर्गा उत्सव को लेकर बनाये अनर्गल नियमों के विरोध में शिवराज सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हिन्दुओं पर लाठियाँ बरसाई गई। शिवराज जी, आपका ये अहंकार आपके अंत का आरंभ है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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