कांग्रेस के बागी विधायकों का दिग्विजय से मिलने से इंकार, जारी किए वीडियो

कांग्रेस के बागी विधायकों का दिग्विजय से मिलने से इंकार, जारी किए वीडियो

भोपाल।आज सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश के सियासी घमासान को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बागी विधायकों को मनाने बैंगलुरु पहुंचे है, जब विधायकों से उन्हें मिलने नही दिया गया तो वे होटल के बाहर ही धरने पर बैठ गए और पुलिस ने बिना परमिशन धरने पर बैठने पर दिग्विजय समेत सभी मंत्रियों-विधायकों को गिरफ्तार कर लिया।इसके बाद दिग्विजय ने कर्नाटक पुलिस और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए और अमरण अनशन की घोषणा कर दी है। इसी बीच बागी विधायकों ने वीडियो के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी है और सभी से मिलने से साफ इंकार करते हुए कर्नाटक पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद होटल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

गोविंद राजपूत ने अपने वीडियो में कहा है कि हमें किसी से नही मिलना। हम अपनी इच्छा से यहां आए है और हमें किसी ने बंधक नही बनाया।हमने अपना इस्तीफा दे दिया है अब कहने सुनने का सवाल ही पैदा नही होता।इमरती देवी ने कहा कि हम किसी से नही मिलने चाहते है। हम दिग्विजय के कारण ही यहां आए है। उन्होंने पूरी कांग्रेस को बर्बाद कर दिया और अब हमसे मिलने आए है, लेकिन हम किसी से मिलना नही चाहते । बैंगलुरु पुलिस से निवेदन है कि हमारी सुरक्षा बढ़ाई जाए और किसी को ना मिलने दिया जाए। ऐंदल सिंह कंसाना ने कहा कि हम किसी से मिलना चाहते है जब आपने एक साल में हमारी नही सुनी तो एक दिन में क्या सुन लोगो। हम किसी से नही मिलना चाहते है। हम मर्जी से यहां आए है और मर्जी से जाएंगे।हरदीप डंग ने कहा कि मै किसी से नही मिलना चाहता हूं। मैं पहले ही त्याग पत्र दे चुका हूं।जब हमारी सुननी थी तब तो आपने सुनी अब क्या फायदा।मैं अपनी मर्जी से आया हूं और किसी से मिलना नही चाहता।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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