देश की सुरक्षा में शहीद हुआ MP का लाल, नवंबर में हुई थी शादी, पत्नी से कहा था कश्मीरी शाल लाऊंगा

देश की सुरक्षा में शहीद हुआ MP का लाल, नवंबर में हुई थी शादी, पत्नी से कहा था कश्मीरी शाल लाऊंगा

भोपाल| भारत-चीन (India-China) के बीच हुए विवाद में मध्यप्रदेश के रीवा (Rewa) का भी एक लाल शहीद हो गया है| शहीद दीपक सिंह गहरवार (Deepak Singh Gaharwar) जो रीवा जिले के मनगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम फरेदा गांव के रहने वाले थे| आठ माह पहले ही उनकी शादी हुई थी, मंगलवार देर रात सेना के अधिकारियों ने दीपक सिंह के शहीद होने की सूचना पिता को फोन पर दी। जवान के शहीद होने की सूचना से उनके गाँव समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

दीपक 21 साल के थे। सेना ने उनके पार्थिव शरीर को लेह में रखा है। गुरुवार को रीवा और फिर मनगवां इलाके के फरेहदा गांव लाया जाएगा। इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जवान के शहीद होने पर ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी है| उन्होंने लिखा ‘तूने सींचा है अपने लहू से वतन की मिट्टी को, वीरों की इस मिट्टी पर हम अभिमान करते हैं। ऐ मेरे वतन के शेर तेरे जाने से चीत्कार रहा दिल तेरे लहू के हर कतरे, तेरी शहादत को सलाम करते हैं। भारत-चीन की झड़प में शहीद हुए रीवा के वीर सपूत दीपक सिंह के चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि’।

नवंबर में हुई थी शादी, पत्नी से कहा था कश्मीरी शाल लाऊंगा
बता दें कि दीपक की शादी नवंबर 2019 में हुई थी, जिसके बाद दीपक शादी के बाद उन्हें छोड़कर अपने तैनाती के लिए रवाना हो गए थे। वह अंतिम बार मार्च में होली मनाने घर आये थे । 15 दिन पहले दीपक ने घर पर फोन करके पत्नी से कहा था कि घर वापसी के समय वे उसके लिए कश्मीरी शाल एवं कुछ गहने लेकर आएंगे। लेकिन अब दीपक शहीद होकर तिरंगे में लिपटकर घर वापस आएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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