ई-अटेंडेंस को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग सख्त, उल्लंघन पर अतिथि शिक्षकों का मानदेय काटने का आदेश

स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए ई अटेंडेंस लगाना अनिवार्य किया है, अब शिक्षक को स्कूल पहुँचने के बाद विभाग के ऐप पर अटेंडेंस लगानी होगी , इस आदेश का विरोध भी हो रहा है लेकिन शिक्षा विभाग इस पर सख्ती कर रहा है ।
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शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ऐप पर ई अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए हैं हालाँकि कई शिक्षक संच इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन विभाग की सख्ती बरक़रार है। शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों को लेकर इस मामले में कड़े निर्देश जारी किये हैं, विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि जो अतिथि शिक्षक नियम का उल्लंघन करेगा 18 जुलाई से उसको मानदेय नहीं मिलेगा।

लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक पत्र जारी किया है इस पत्र में स्कूलों में पदस्थ अतिथि शिक्षकों के लिए ई अटेंडेंस पर सख्ती की बात कही गई है, संचालक ने पत्र में उल्लेख किया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26  में आमंत्रित किये गए अतिथि शिक्षकों को हमारे ऐप पर अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन ये खेद की बात हिया कि अभी भी 80 प्रतिशत अतिथि शिक्षक ऐप पर अटेंडेंस नहीं लगा रहे।

अतिथि शिक्षकों के लिए हमारे शिक्षक ऐप पर अटेंडेंस लगाना अनिवार्य 

संचालक के के द्विवेदी ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सभी संकुल प्राचार्य और शाला प्रभारियों को निर्देश दें कि जो अतिथि शिक्षक ऐप पर ई अटेंडेंस नहीं लगाएगा उसे मानदेय नहीं दिया जायेगा यानि उसका वेतन काट दिया जायेगा।

विभाग ने दिखाई सख्ती,  18 जुलाई से मानदेय काटने के आदेश 

पत्र में अतिथि शिक्षकों आदेश दिया गया है कि वे अब से आवश्यक रूप से हमारे शिक्षक ऐप पर अपनी अटेंडेंस लगायें, 18 जुलाई से आवश्यक है और जो इसका उल्लंघन करेगा अर्थात ऐप पर अटेंडेंस नहीं लगाएगा उसे मानदेय नहीं मिलेगा यानि उसे वेतन नहीं मिलेगा।

ई-अटेंडेंस के आंकड़ों ने अधिकारियों को चौंकाया

जानकारी के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की उसमें जो आंकड़े सामने आए उसे देखकर अधिकारी चौंक गए। प्रदेश के अनूपपुर में एक भी अतिथि शिक्षक ने ई अटेंडेंस नहीं लगाई, इसके अलावा किसी जिले में 10 प्रतिशत तो कहीं 20 प्रतिशत ई अटेंडेंस दर्ज हुई जिसके बाद अब विभाग एन सख्ती दिखाई है।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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