लॉकडाउन-2 की घोषणा के बाद सिंधिया ने क्या कहा, देखिये वीडियो

लॉकडाउन-2 की घोषणा के बाद सिंधिया ने क्या कहा, देखिये वीडियो

भोपाल| देश में कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में लॉकडाउन को 3 मई तक आगे बढ़ा दिया है| साथ ही उन्होंने कहा कि कल यानी 15 अप्रैल को सरकार लॉकडाउन को लेकर नई गाइडलाइन जारी करेगी| उन्होंने कहा कि इस बार लॉकडाउन का पालन और कठोर तरीके से किया जाएगा, वहीं, जिन इलाकों में कोरोना संक्रमण के केस नहीं मिलेंगे वहां 20 अप्रैल से कुछ शर्तों के साथ छूट दी जाएगी| पीएम के निर्णय के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोगों से अपील की है कि प्रधानमंत्री के इस निर्णय का देशहित में पूर्ण रूप से अनुशासन से लॉक डाउन का पालन करें, हमारी सावधानी और अनुशासन ही इस बीमारी का इलाज है|

सिंधिया ने ट्विटर पर वीडियो जारी कर लोगों से अपील की है| उन्होंने कहा “एक जाग्रत राष्ट्र के नागरिक के रूप में कोरोना के संकट के इस समय आइये हम सब मिलकर संकल्प लें – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा लॉक डाउन बढ़ाये जाने के निर्णय को और अधिक सशक्त और मज़बूत बनाने का”।

सिंधिया ने कहा घर में रहकर ही एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय मिलकर साथ में दें| उन्होंने कहा मध्य प्रदेश और देश भर के कार्यकर्ताओं व नागरिकों से अनुरोध है कि कोरोना महामारी संकट के इस समय में अपने आसपास जरूरतमंदों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए राशन, मास्क और सेनिटाइजर का वितरण करें|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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