वर्ल्ड यूनानी डे पर राजधानी में होगा नेशनल सेमिनार, सेवा करने वाले कई होंगे सम्मानित

वर्ल्ड यूनानी डे पर राजधानी में होगा नेशनल सेमिनार, सेवा करने वाले कई होंगे सम्मानित

भोपाल। चिकित्सा क्षेत्र में अन्य पद्धतियों की तरह यूनानी चिकित्सा भी अपना खास मुकाम रखती है। इस पद्धति के विस्तार और मकबूलियत का ही नतीजा है कि अब इसपर मरीजों का यकीन गहरा होता जा रहा है। सदियों पुरानी इस पैथी के चाहने, मानने और इसके साथ काम करने वाले इसके लिए खास दिन सेलिब्रेट करने की तैयारी कर रहे हैं। 11 फरवरी को दुनियाभर में मनाए जाने वाले वर्ल्ड यूनानी डे को लेकर एक नेशनल सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन 13 फरवरी को आयोजित किया जाएगा।

यूनानी चिकित्सा से जुड़े विभिन्न संगठन और सहयोगियों द्वारा राजधानी भोपाल में एक नेशनल सेमिनार गांधी मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन यूनानी ऑफिसर्स एसोसिएशन, मप्र यूनानी मेडिकल प्रोफेशनल एसोसिएशन, मप्र ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस द्वारा किया जा रहा है। संयोजक मंडल के डॉ आजम खान ने बताया कि कार्यक्रम में प्रदेश की आयुष मंत्री डॉ विजय लक्ष्मी साधौ बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में मध्य विधायक आरिफ  मसूद और आयुष विभाग के आयुक्त एमके अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। डॉ आजम ने बताया कि वल्र्ड यूनानी डे पर होने वाले सेमिनार में विषय विशेषज्ञों द्वारा अपनी बात रखी जायेगी। उन्होंने बताया कि इस मौके पर विभाग, समाज और पत्रकारिता क्षेत्र में खास योगदान देने वाली कई हस्तियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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