सियासी घटनाक्रम पर शिवराज ने तोड़ी चुप्पी, किया ये बड़ा खुलासा

सियासी घटनाक्रम पर शिवराज ने तोड़ी चुप्पी, किया ये बड़ा खुलासा

भोपाल।
मध्यप्रदेश में जारी महासंग्राम को लेकर अब पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने चुप्पी तोड़ी है। शिवराज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए है। शिवराज का कहने है कि मैं तो दिल्ली आता-जाता ही रहता हूं ।भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हूं जब भी दिल्ली बुलाया जाता हैं , मै जाता हूं भारतीय जनता पार्टी के काम से जाता हूं अभी पार्टी के काम से आ कर अब आगर जा रहा हूं।

वही उन्होंने दिग्विजय के विधायकों को होटल में बधंक बनाने के आरोपों को लेकर कहा कि दिग्विजय सिंह को इससे क्या लेना कि मैंने क्या किया। एक ही उनका काम केवल आरोप लगाना है ।अब इतने कांग्रेस में गुट है कि आपस में ही मारामारी मची है और आरोप हम पर लगाते हैं इसका मतलब क्या है। राज्यसभा के सवाल पर शिवराज ने कहा कि दिग्विजय सिंह लड़ेंगे या ज्योतिरादित्य लड़ेंगे या कौन लड़ेगा वही बता सकते है इसी चक्कर में यह सब कुछ हो रहा है।

वही सरकार गिराने के सवाल पर कहा कि इसका सवाल ही पैदा नहीं होता। भारतीय जनता पार्टी का ऐसी कोई सोच नहीं रही। हमने पहले भी कहा है हम ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं है लेकिन अगर अपने बोझ से अगर कुछ होता है तो वह जाने।अभी हम आगर जा रहे हैं आगर उप चुनाव जीतना है।

कमलनाथ पर हमला बोलते हुए कहा कि पूरा प्रदेश त्राहि त्राहि कर रहा है किसान परेशान है रो रहा है गरीब परेशान है बच्चे परेशान हैं माताएं बहने परेशान है कांग्रेस के विधायक खुद परेशान है अब मामला उनके घर का है आरोप हम पर लगाते हैं यह कौन सी बात हुई।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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