माता पिता खो चुके बच्चों के साथ शिवराज ने मनाई Diwali, बोले “मामा तो है अभी जिंदा”

माता पिता खो चुके बच्चों के साथ शिवराज ने मनाई Diwali, बोले “मामा तो है अभी जिंदा”

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  कोरोना काल में जिन बच्चों के सिर से माता पिता का साया उठ गया उनकी सूनी दिवाली (diwali)  को रोशन  करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) ने आज उन्हें मुख्यमंत्री निवास पर आमंत्रित किया और उनके साथ दिवाली मनाई। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बात की, उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें भोजन कराया, उन्हें गिफ्ट भी दिए। शिवराज ने कहा कि भले ही कोरोना ने इनसे इनके माता पिता को छीन लिया है लेकिन इनका मामा अभी जिंदा है।

कोविड बाल सेवा योजना के हितग्राही बच्चों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  आज दिवाली मनाई, उनके साथ पत्नी साधना सिंह भी थी। शिवराज ने कहा कि आज मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना के अपने बच्चों के साथ निवास पर दिवाली मनाई।  कोरोना ने भले ही इनसे माता-पिता को छीन लिया है, लेकिन इनका मामा शिवराज अभी जिंदा है। मेरे होते हुए मेरे बच्चों को अपनों की कमी नहीं खले, यह मेरा दिल से प्रयास है। 

ये भी पढ़ें – भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुआ Diwali Pujan, वीडी शर्मा ने किया ये आह्वान

उन्होंने कहा कि दीप जलाते, भोजन करते मेरे इन बच्चों के चेहरे पर जो ऊर्जाभरी मुस्कान थी, वह देखकर मन को संतोष हुआ। भगवान से यही प्रार्थना करता हूं कि हे मेरे प्रभु मुझे इतनी सामर्थ्य देना कि इनके चेहरे पर कभी उदासी न आने दूं। मैं इनके मामा और माता-पिता का भी प्यार दे सकूं।

ये भी पढ़ें – PM Modi Diwali 2021 : नौशेरा पहुंचे नरेंद्र मोदी, सैनिकों को दी दिवाली की बधाई, बढ़ाया हौसला

सीएम शिवराज ने कहा, मैं अपने बच्चों से यह कहना चाहता हूं कि तुम जीवन में कभी हताश और निराश मत होना। लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ो, मेहनत करो, तुम्हारी राह में आने वाली बाधाओं को तुम्हारा मामा शिवराज हटायेगा। मैं, मेरी शुभकामनाएं और मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews