सिंधिया कमलनाथ के बयानों पर शिवराज की चुटकी, दिग्विजय ने किया बचाव

सिंधिया कमलनाथ के बयानों पर शिवराज की चुटकी, दिग्विजय ने किया बचाव

इंदौर/छिंदवाड़ा। पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया का अतिथि शिक्षकों के लिए सड़क पर उतरने का बयान और उसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ का यह बयान कि उतरना है तो उतर जाएं, बीजेपी को कांग्रेस पर चुटकी लेने का बढ़िया मौका मिल गया है। इसपर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सिर फुटव्वल कांग्रेस की संस्कृति है और कांग्रेसी यह सोच कर ही खुश है कि मेरी तो एक ही आंख फूटी, सामने वाले की दोनों आंखें फूट गई। शिवराज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आपस में कांग्रेसियों की इस लड़ाई से नुकसान मध्यप्रदेश को हो रहा है। कम से कम मेरे प्रदेश पर तो रहम करें कांग्रेसी।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सिंधिया के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि वह अकेले नहीं है, पूरी कांग्रेस उनके साथ है। हालांकि वचन पत्र एक साल के लिए नहीं पूरे पांच साल के लिए होता है और कमलनाथ जी एक-एक करके वचन पूरे कर रहे हैं। साथ ही दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस में पूरी तरह एकजुटता है और कमलनाथ जी के नेतृत्व में हम सब एक साथ कांग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दिग्विजय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने एक ऐसे समय में जब प्रदेश की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, 14 हजार करोड़ रुपए जीएसटी के काट लिए हैं जो बेहद निराशाजनक हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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