शिवराज ने क्यों कहा- “मैं जनता का हनुमान, जनता ही श्रीराम”

शिवराज ने क्यों कहा- “मैं जनता का हनुमान, जनता ही श्रीराम”

भोपाल

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं पूरी तरह जनता के हित के लिये प्रतिबद्ध और समर्पित हूं। उन्होने कहा कि समर्पण, भक्ति, निष्ठा का अनुपम उदाहरण है हनुमान जी जो हमारे आराध्य भी हैं और प्रेरणा भी। वो श्रीराम के भक्त थे और हमारी राम हमारी जनता है। ‘रामकाज कीन्हे बिना मोहे कहां विश्राम’ ये वाक्य मुझे प्रेरणा देता है और मैं 23 मार्च से कोरोना के खिलाफ लड़ रहा हूं और जब तक कोरोना से जीत नही जाते हम चैन से नही बैठेंगे।

वहीं सीएम ने जनता से अपील की है कि जो कोरोना पीड़ित हैं उनके साथ मानवीयता का व्यवहार रखें। सोशल डिस्टेंसिंग बनाना बेहद जरूरी है, लेकिन उनके साथ स्नेह और प्रेम का व्यवहार रखें और खुद को भी सुरक्षित रखिये।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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