कांग्रेस एक बार फिर मध्यप्रदेश में कृषि व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर है। जीतू पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए “खेत बचाओ अभियान” की घोषणा पर कहा है कि इसकी सबसे अधिक आवश्यकता उनके गृह राज्य मध्यप्रदेश में है जहां किसान लगातार खाद-बीज की किल्लत, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीदी व्यवस्था की अव्यवस्था से जूझ रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कृषि व्यवस्था पूरी तरह दबाव में है और किसान आर्थिक संकट के कारण आत्महत्या जैसे गंभीर कदम तक मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठकर कृषि सुधार और शोध-अनुसंधान के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने की खेत बचाओ अभियान की घोषणा
शिवराज सिंह चौहान ने भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कहा कि 1 जून से 15 जून तक पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ प्रस्तावित है जिसमें किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी और योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि हमारा रिसर्च, शोध और अनुसंधान सीधे किसानों तक पहुँचे और उन्हें तत्काल उसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि खेती को लेकर हमारे तीन लक्ष्य हैं। पहला, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। दूसरा, पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराना और तीसरा किसानों की बेहतर आजीविका और उनकी आय बढ़ाना। कृषि मंत्री ने कहा कि खेती में हम नए प्रयोग करना चाहते हैं और खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक खेतों में जाकर किसानों से संवाद करेंगे।
जीतू पटवारी ने घेरा
इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरते हुए कहा है कि “खेत बचाओ” अभियान की सबसे ज्यादा जरूरत उनके अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश में है। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश के किसान खाद-बीज की किल्लत, MSP और खरीदी की अव्यवस्था, कर्ज के बोझ तथा बिजली कटौती और सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं। दिल्ली में बैठकर कागजी रिसर्च-अनुसंधान के दावे करने वाली भाजपा सरकार का जमीन की सच्चाई से कोई वास्ता नहीं रह गया है।” कांग्रेस नेता ने केंद्रीय कृषि मंत्री से कहा है कि पहले मध्यप्रदेश में किसानों के सूखते खेत, बर्बाद फसलें और परेशान अन्नदाताओं को बचाइए और फिर देश को कृषि मॉडल का ज्ञान दीजिए।






