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उज्जैन महाकाल मंदिर जमीन विवाद: बीजेपी विधायक की कंपनी को सरकारी जमीन बेचने के आरोप, उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि मंदिर पार्किंग में उपयोग हो रही सरकारी जमीन को भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी को बेच दिया गया और सौदे में नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन में अब आस्था नहीं, भाजपा का “लैंड मॉडल” चल रहा है।
उज्जैन महाकाल मंदिर जमीन विवाद: बीजेपी विधायक की कंपनी को सरकारी जमीन बेचने के आरोप, उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा

Umang Singhar

उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र की जमीन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर महाकाल मंदिर से जुड़ी जमीन को आरोप लगाए हैं।  उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर की पार्किंग के लिए उपयोग हो रही सरकारी जमीन को पहले निजी बताया गया, फिर उसे भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी को बेच दिया गया और अब वहां फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी की जा रही है।

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या आपकी सरकार में महाकाल लोक भी भाजपा नेताओं और आपके “मित्रों” की प्रॉपर्टी डील का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार ने धर्म को आस्था नहीं, कारोबार बना दिया है।”

क्या है मामला

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, हरि फाटक क्षेत्र में महाकाल मंदिर की पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रही करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी। बाद में इसे निजी खाते में दर्ज करा लिया गया। इसी साल 2 मार्च को यूटोपिया होटल एंड रिसोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इस जमीन को 3.82 करोड़ रुपये में खरीदा। कंपनी के डायरेक्टरों में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय (आलोट) और उनके साझेदार शामिल हैं। इस मामले की शिकायत राजेंद्र कुवाल ने मुख्य सचिव, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को दस्तावेजों के साथ की है। वहीं हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में भी जनहित याचिका दायर की गई है।

आरोप है कि कुछ खसरों की जमीन 1950 और 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय थी, जिसका उपयोग अभी भी मंदिर पार्किंग के रूप में हो रहा है। शिकायत में दावा किया गया है कि कमर्शियल जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराई गई। इलाके की कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक जमीन की वास्तविक कीमत करीब 31.51 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन सिर्फ 3.82 करोड़ रुपये में सौदा दिखाया गया। इससे लगभग 3.40 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की चोरी का आरोप है। हालांकि भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने आरोपों से इनकार किया।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

इसे लेकर उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की पार्किंग के लिए उपयोग हो रही जमीन को निजी कंपनी को बेच दिया गया है और अब वहां फाइव स्टार होटल बनाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि “महाकाल की नगरी में अब आस्था नहीं, भाजपा का लैंड मॉडल चल रहा है।” मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा किया कि करोड़ों की जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री की गई, जिससे लगभग 3.40 करोड़ की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की चोरी हुई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि महाकाल मंदिर की पार्किंग वाली सरकारी जमीन को पहले निजी नाम पर कराया गया, फिर भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी को बेच दिया गया।” उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया है कि क्या आपकी सरकार में महाकाल लोक भी भाजपा नेताओं और आपके मित्रों की प्रॉपर्टी डील का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि पहले महाकाल लोक में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, अब महाकाल मंदिर की जमीन पर कब्जे और सौदेबाजी के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने धर्म को आस्था की जगह कारोबार बना दिया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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