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FPAI भोपाल द्वारा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम पर ऑनलाइन सत्र आयोजित, PoSH एक्ट के विभिन्न पहलुओं पर दी गई जानकारी

Written by:Gaurav Sharma
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FPAI भोपाल शाखा ने डिग्निटी और सिम्स अस्पताल के सहयोग से कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम (PoSH Act) विषय पर सफल ऑनलाइन जागरूकता सत्र आयोजित किया।
FPAI भोपाल द्वारा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम पर ऑनलाइन सत्र आयोजित, PoSH एक्ट के विभिन्न पहलुओं पर दी गई जानकारी

कार्यस्थल एवं शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न की रोकथाम तथा इस संबंध में जागरूकता प्रसार के महती उद्देश्य से एफपीएआई भोपाल शाखा द्वारा डिग्निटी–पॉश पॉलिसी एट वर्कप्लेस एवं सिम्स अस्पताल, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन जागरूकता सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह सत्र दिनांक 18 मई, 2026 को प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक गूगल मीट के माध्यम से संचालित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (PoSH Act) के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ एफपीएआई की चेयरपर्सन डॉ. रुचिरा चौधरी के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के प्रेरक कथन ‘एन इनजस्टिस एनीवेयर इज अ थ्रेट टू जस्टिस एवरीवेयर’ को उद्धृत करते हुए समाज में न्याय की महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ. चौधरी ने बलपूर्वक कहा कि एक न्यायपूर्ण एवं समतामूलक समाज की स्थापना हेतु प्रत्येक व्यक्ति को अन्याय के विरुद्ध न केवल जागरूक रहना अपितु सक्रिय भूमिका भी निभानी आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि कानून का भय तथा सामाजिक जागरूकता दोनों ही एक सुरक्षित वातावरण के निर्माण में अपरिहार्य हैं, और अन्याय के समक्ष चुप्पी साधने के बजाय मुखर होकर अपनी आवाज बुलंद करना सर्वथा आवश्यक है। उनके उद्बोधन से उपस्थित सभी प्रतिभागियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

तत्पश्चात, अधिवक्ता सुश्री ऋतु आगवेकर जी द्वारा यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम, 2013 (PoSH Act 2013) पर एक अत्यंत प्रभावशाली एवं तकनीकी सत्र का संचालन किया गया। उनके सत्र में सुरक्षित कार्यस्थल के निर्माण, आंतरिक समिति (Internal Committee – IC) की संरचना एवं कार्यप्रणाली, यौन उत्पीड़न के विभिन्न स्वरूपों की विस्तृत व्याख्या तथा शिकायत प्रक्रिया में गोपनीयता के महत्व जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक जानकारी प्रदान की गई। प्रतिभागियों को इस अधिनियम के कानूनी प्रावधानों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से अवगत कराया गया, जिससे उन्हें कार्यस्थल पर अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में सहायता मिली।

46 प्रतिभागियों की रही सक्रिय भागीदारी

इस महत्वपूर्ण सत्र में पाँच प्रतिष्ठित महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों सहित कुल 46 प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों, स्टाफ सदस्यों एवं सहयोगी संस्थाओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई, जिससे कार्यक्रम की सफलता एवं प्रासंगिकता और भी बढ़ गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया, जिससे सत्र अत्यंत संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक बन गया।

प्रेरक संदेशों के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन कुछ सारगर्भित एवं प्रेरक संदेशों के साथ किया गया। इसमें ‘जहाँ नारी का सम्मान बढ़े, वही समाज महान बने’ के उद्घोष के साथ महिला सशक्तिकरण एवं सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। साथ ही यह संदेश भी प्रसारित किया गया कि जागरूकता ही वास्तविक सुरक्षा है, और किसी भी प्रकार के अन्याय के विरुद्ध चुप्पी साधने के बजाय अपनी आवाज उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भी रेखांकित किया गया कि एक सुरक्षित कार्यस्थल का निर्माण एवं उसका रखरखाव हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए हर व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।

अंत में, एफपीएआई भोपाल शाखा की ओर से श्री जगदीश परसाई जी द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, विशेष रूप से एफपीएआई चेयरपर्सन डॉ. रुचिरा चौधरी जी, अधिवक्ता सुश्री ऋतु आगवेकर जी, श्री लखन सिंह मकवाना जी, श्री योगेश निर्गुणकर जी तथा सभी सक्रिय प्रतिभागियों का हृदय से आभार व्यक्त किया गया। यह ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में पूर्णतः सफल एवं अत्यंत सार्थक सिद्ध हुआ, जिसने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम हेतु महत्वपूर्ण विधिक एवं सामाजिक जागरूकता का प्रसार किया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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