कर्फ्यू के बीच सड़कों पर उतरे शिवराज, कांग्रेस ने कसा तंज-“घुमना कहाँ तक उचित”

कर्फ्यू के बीच सड़कों पर उतरे शिवराज, कांग्रेस ने कसा तंज-“घुमना कहाँ तक उचित”

भोपाल।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल की सड़कों पर निकलकर स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मी और निगम कर्मियों को धन्यवाद दिया और प्रेरणा दी के आप इसी तरह जन सेवा में लगे रहिए । साथ ही मुख्यमंत्री ने दवा, सब्जी और किराने की दुकान में पहुंचकर लोगों से सोशल डिस्टेंस बनाए रखने की अपील की ।

शिवराज ने कहा कि इस मुश्किल के समय जनसेवा में लगे सभी पुलिसकर्मी, निगमकर्मी और स्वास्थ्यकर्मियों को मेरा प्रणाम है।आप सभी लोग अपना मनोबल ऊँचा रखें, हम सभी नागरिकों को इस संकट के पार ले जाएंगे।सभी नागरिकों से अनुरोध है कि कृपया प्रशासन का सहयोग करें,घर पर रहें और सुरक्षित रहें।वही आगे उन्होंने लिखा है कि अतिआवश्यक सेवाओं में लगे सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ जो अपनी जान जोखिम में डालकर अन्य लोगों की सेवा कर रहे हैं।मैं सब्ज़ी,दवाई व किराना दुकान संचालकों से एवं वहाँ जा रहे लोगों से भी अपील करता हूँ कि डिस्टेंस मेंटेन करें, सुरक्षित रहें।

कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने तंस कसते हुए ट्वीटर पर लिखा है कि जब देश में मोदी जी की अपील पर लॉक डाउन का पालन सभी कर रहे है।वर्क एट होम कर रहे है।ऐसे में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी का यूँ सड़कों पर घुमना कहाँ तक उचित है ?यह उनके , उनके परिवार , उनके सुरक्षा कर्मियों , उनके स्टाफ़ के स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ठीक नहीं है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews