शिवराज का सिंधिया पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष, इन्हीं के खेमे के मंत्री क्यों परेशान

शिवराज का सिंधिया पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष, इन्हीं के खेमे के मंत्री क्यों परेशान

भोपाल।मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री (chief minister) और भाजपा (bjp) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (national vice president) शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) ने ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) को लेकर एक ट्वीट (tweet) किया है ।बिना सिंधिया का नाम लिए उन्होंने लिखा है कि “क्या बात है एक विशेष के में के मंत्री ही क्यों अधिकारियों से इतनी परेशान हैं ।कहीं कोई अधिकारी एक मंत्री जी की बात सुनने को तैयार नहीं तो किसी मंत्री जी को काम करवाने के लिए अधिकारी के चरणों में लौटना पड़ रहा है ।क्या इन मंत्रियों के विभाग आजकल यह खुद चला रहे हैं या फिर कोई और।”

दरअसल शुक्रवार को मध्य प्रदेश के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर (pradhumna singh tomar) ने ग्वालियर नगर निगम (gwalior nagar nigam) की बैठक के दौरान एक सब इंजीनियर के पैर छू लिए थे क्योंकि चार महीने से लगातार कहने के बाद भी उनके  क्षेत्र में काम पेंडिंग पड़ा हुआ था ।इसी के साथ साथ शुक्रवार को ही वन मंत्री (forest minister) उमंग सिंगार (umang singhar) ने मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamalnath) को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि अतिरिक्त मुख्य सचिव वन मंत्री की तो छोड़िए मुख्यमंत्री की भी बात नहीं मानते हैं. दरअसल प्रधुम्न और उमंग दोनों ही ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के मंत्री माने जाते हैं और शिवराज का कटाक्ष उसी परिपेक्ष्य  में है ।शनिवार को पूरे दिन इसी मामले पर मध्य प्रदेश के भाजपा नेताओं वीडी शर्मा (VD SHARMA) और नरोत्तम मिश्रा (NAROTTAM MISHRA) सहित गोपाल भार्गव ( GOPAL BHARGVA) ने भी इस विषय को लेकर सरकार को घेरा था।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews