शिवराज का दूरदर्शी फैसला, अर्थव्यवस्था सुधारने लघु उद्योगों को दी जाएगी सहायता

शिवराज का दूरदर्शी फैसला, अर्थव्यवस्था सुधारने लघु उद्योगों को दी जाएगी सहायता

भोपाल

लॉकडाउन के बीच प्रदेश में उद्योग (industries) बंद पड़े हैं, दुनिया भर के अर्थशास्त्री (economist) ये आशंका भी जता रहे हैं कि कोरोना क्राइसिस (corona crisis) से निकलने के बाद भयावह मंदी (recession) आ सकती है। ऐसी स्थितियों में हमेशा से लघु एवं कुटीर उद्योग (small industries) ही बाजार को बचाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। प्रदेश सरकार भी दूरदर्शिता बरतते हुए लघु एवं अन्य छोटे उद्योगों को सहयोग करने के लिये तैयार है।

सीएम शिवराज (shivraj) ने लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक (review meeting) में निर्देश दिए हैं कि इन उद्योगों को राहत एवं रियायत (relief) देने संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जाएं। सीएम ने कहा है कि विभाग के अधिकारी (officers) ये निर्णय लें कि किस तरह की छूट एव राहत से इन उद्योगों का विकास हो सकता है और इसे लेकर अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। उम्मीद है कि इसके अंतर्गत बिजली की तय कीमतों (electricity charge), प्रॉपर्टी टैक्स (property tax) में छूट के साथ सरकार इन्हें और भी राहत दे सकती है। बता दें कि आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में राज्य सरकार ने मंडी एक्ट में भी संशोधन किया है और इसी कड़ी में लघु व सूक्ष्म उद्योगों को सहायता करने का फैसला लिया गया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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