लॉकडाउन खुलने के बाद भी बंद रह सकते हैं शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थल और स्कूल-कालेज

लॉकडाउन खुलने के बाद भी बंद रह सकते हैं शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थल और स्कूल-कालेज

भोपाल| देश भर में कोरोना के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिन का लॉक डाउन घोषित किया था| जिसकी अवधि 14 अप्रैल को समाप्त हो रही है| लॉक डाउन आगे बढ़ाया जाए या नहीं इसको लेकर सरकारें विचार कर रही है| मध्य प्रदेश में इसको लेकर तैयारियां की जा रही है| वहीं लॉकडाउन खुलने की स्तिथि में शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थल और स्कूल-कॉलेज को एक माह और बंद रखा जा सकता है। इसके अलावा सब्जी और किराना समेत कुछ दुकानों को भी आंशिक रूप से खोलने की अनुमति दी जा सकती है|

अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान की अध्यक्षता की कमेटी ने राज्य सरकार को कोरोना के हालात को लेकर रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद राज्य की सरकार केंद्र सरकार को भेजेगी। सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार ने रिपोर्ट में शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थल और स्कूल-कॉलेज को लॉक डाउन ख़त्म होने के बाद भी बंद रखने का सुझाव दिया है| इसके साथ ही सार्वजनिक रूप से ऐसे आयोजन पर पाबंदी रहेगी जहां ज्यादा लोग एकत्रित हो सकते हैं। कोरोना प्रभावित जिलों में कहां और कितनी दुकानों को खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन दुकानों को ही शुरुआत में खोला जाए, जिससे सबसे ज्यादा आवश्यकता हो। परिवहन व्यवस्था को किस स्तर पर लागू किया जाए जैसे सुझाव शामिल किये गए हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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