भोपाल: सिंहस्थ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या के बीच भीड़ और व्यवस्थाएं संभालने के लिए इस बार 15 हजार से ज्यादा सेवादूत तैयार किए जाएंगे। इन्हें भीड़ प्रबंधन के साथ आपदा और दूसरी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके लिए भोपाल में अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इसकी घोषणा की।
ट्रेनिंग सेंटर बनने तक सेवादूतों की तैयारी के लिए जरूरत के मुताबिक सांदीपनि विद्यालयों के भवन और परिसरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ आपदा प्रबंधन संस्थान के सहयोग से 100 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। प्रदेश के हर जिले से 500 और उज्जैन संभाग के सभी जिलों से एक-एक हजार युवाओं को सेवादूत के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
पिछली बार 7,500, इस बार 15 हजार से ज्यादा सेवादूत
सिंहस्थ 2016 में करीब 7,500 स्काउट और गाइड ने 10 कैंपों के जरिए सेवाएं दी थीं। सिंहस्थ 2028 में यह संख्या बढ़कर 15 हजार से अधिक होगी। ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक 20 से अधिक कैंपों के माध्यम से सेवा का मोर्चा संभालेंगे।
करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने के अनुमान को देखते हुए भीड़ प्रबंधन को सिंहस्थ की सबसे बड़ी चुनौतियों में रखा गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सेवादूतों को किसी चुनौती या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भी तैयार रहना होगा। सरकार का लक्ष्य सिंहस्थ को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करना है।
सोशल मीडिया से फैलने वाली अफवाहों से निपटने की भी ट्रेनिंग
मैदान में भीड़ और व्यवस्थाएं संभालने के साथ सोशल मीडिया से फैलने वाली अफवाहें भी चुनौती होंगी। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि स्काउट एंड गाइड को इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए भी प्रशिक्षित करना होगा।
मध्यप्रदेश स्काउट एंड गाइड के राज्य कोषाध्यक्ष रमेश शर्मा के मुताबिक सिंहस्थ 2028 में स्काउट एंड गाइड को 30 से अधिक शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें 20 शिविर स्काउट-गाइड के होंगे।






