…तो इसलिए गृहमंत्री के बंगले पर सुबह-सुबह पहुंचे थे CM शिवराज

…तो इसलिए गृहमंत्री के बंगले पर सुबह-सुबह पहुंचे थे CM शिवराज

भोपाल।
“मैं मुख्यमंत्री हूं, वे गृहमंत्री हैं। नरोत्तमजी का बहुत दिनों से आग्रह था कि मैं घर पर आऊं। लंबे समय से नाश्ता ड्यू था, इसलिए आज आया हूं। यह बात आज सीएम शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) ने गृहमंत्री के बंगले से बाहर आने पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों के बीच उपचुनाव(by election), राज्यसभा (rajysabha) ,मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet expansion) और पार्टी नेताओं में पनपे असंतोष को लेकर चर्चा हो सकती है, लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ।खास बात ये है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब शिवराज खुद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात करने उनके बंगले पहुंचे थे।

दरअसल, आज शुक्रवार को सुबह सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा( Home and Health Minister Narottam Mishra) के चार इमली स्थित बंगले पर पहुंचे थे। मिश्रा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। यहां उन्होंने साथ में नाश्ता किया। इसके बाद दोनों के बीच चर्चा भी हुई। इस दौरान पत्रकारों से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि यूं तो हम रोज मंत्रालय में मिलते ही हैं। मैं तो सुबह से लेकर देर रात तक वल्लभ भवन में ही रहता हूं। सालों से युवा मोर्चा के जमाने से हम साथ काम करते आए हैं। “मैं मुख्यमंत्री हूं, वे गृहमंत्री हैं। नरोत्तमजी का बहुत दिनों से आग्रह था कि मैं घर पर आऊं। लंबे समय से नाश्ता ड्यू था, इसलिए आज आया हूं।

शिवराज ने आगे कहा कि हमारे बीच मुलाकातें रोज होती हैं, चर्चा या प्लानिंग करनी होगी तो वह मंत्रालय में भी कर लेंगे, उनके घर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बारिश में गेहूं भीगने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं भीगा है तो सूख जाएगा। इन विपरीत परिस्थितियों में जब कोरोना फैला हुआ था, उस समय की सरकार ने इसकी चिंता नहीं की। वो सरकार, जिससे धान नहीं खरीदा गया।

इससे पहले शिवराज ने आज पर्यावरण दिवस (environment Day) पर मंत्रालय परिसर में पौधरोपण (Plantation)किया। शिवराज ने कहा कि ये पेड़ – पौधे हमारी धरा की समृद्धि और भावी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए ज़रूरी हैं। आइए, हम सब प्रदेश, देश और दुनिया को और बेहतर बनाने में योगदान दें। पौधे लगाएं, हरियाली बढ़ाएं।आज पर्यावरण_दिवस पर आपसे अपील करता हूं कि अपनी धरा को बचाने के लिए पौधरोपण करें। धरती का तेज़ी से तापमान बढ़ रहा है,उसके कारण हमें अनेक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रकृति से हम उतना ही लें, जितने कि वह स्वयं पूर्ति कर सके। साल में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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