भोपाल में सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्रों का प्रदर्शन, NTA भंग और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग

दिल्ली से शुरू हुआ सोनम वांगचुक का आंदोलन अब राजधानी भोपाल पहुंच गया है। रविवार को छात्र संगठनों ने NTA को भंग करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
भोपाल में सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्रों का प्रदर्शन, NTA भंग और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग

भोपाल। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ सोनम वांगचुक का आंदोलन अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। रविवार को छात्र संगठनों और विभिन्न स्वतंत्र छात्र समूहों ने वांगचुक के समर्थन में रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को भंग करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने भारत भवन से प्रभात चौराहे तक एक बड़ी रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों ने NTA को तत्काल भंग करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग की। छात्रों का कहना था कि सोनम वांगचुक को आंदोलन स्थल से जिस तरह हटाया गया, वह पूरी तरह से अनुचित और गलत है। इसके साथ ही, स्वतंत्र छात्रों और अभिभावकों के एक समूह ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर पोस्टर प्रदर्शित कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस समूह ने सोमवार को सुबह से शाम तक भूख हड़ताल करने की भी घोषणा की है।

प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने भावुक होते हुए कहा कि काश उसके पापा भी पेपर खरीद पाते, तो वह भी 15 मिनट में पेपर देकर पास हो जाता। उसे महीनों तक कड़ी मेहनत नहीं करनी पड़ती और उसका भी चयन हो जाता। छात्र ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी सोच किसी भी मेहनती युवा के मन में आना आज की शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। एक अन्य छात्र ने पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं है, बल्कि एक सामान्य छात्र है। छात्र ने डर व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मेरा नाम मत पूछिए, नाम पूछेंगे तो आतंकवादी घोषित कर देंगे।’ उसने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण और अहिंसक ढंग से विरोध प्रदर्शन करने वालों पर भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

एक अभिभावक ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पूरा देश शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहा है। उन्होंने बताया कि हर मां-बाप अपनी खून-पसीने की कमाई से बच्चों को पढ़ाते हैं और उनका सपना होता है कि उनके बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस या आईपीएस बनें। लेकिन पेपर लीक जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने हजारों युवाओं की मेहनत और सपनों पर पानी फेर दिया है। अभिभावक ने दुख जताते हुए कहा कि कई छात्र हताश होकर आत्महत्या जैसे कदम उठा चुके हैं, ऐसे में उन माता-पिता पर क्या गुजरती होगी जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

छात्रा बोली- सिर्फ इस्तीफा नहीं, पूरी व्यवस्था में जवाबदेही तय होना जरूरी

एक छात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पूरी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। हालांकि, उनका कहना था कि यदि किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है, तो व्यवस्था में शामिल अन्य लोगों में भी कार्रवाई का भय व्याप्त होगा। इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी घोषणा की कि वे सोमवार को सोनम वांगचुक के समर्थन में सुबह से शाम तक भूख हड़ताल करेंगे। उन्होंने प्रदेशभर के सभी युवाओं और छात्रों से इस आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर समर्थन देने की भावुक अपील की।

एक अन्य छात्रा ने सरकार द्वारा सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने की कार्रवाई को गलत बताया। उसने कहा कि वांगचुक अपने निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह पहले से ही एक जाने-माने वैज्ञानिक हैं और उन्हें न तो किसी नौकरी की आवश्यकता है और न ही किसी पद की लालसा है। वह केवल छात्रों के भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। छात्रा ने सभी युवाओं से बड़ी संख्या में सोनम वांगचुक के समर्थन में आगे आने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।

20 जुलाई की संसद रैली होगी ऐतिहासिक: SFI प्रदेश सचिव

SFI के प्रदेश सचिव पासवान ने सोनम वांगचुक को आंदोलन स्थल से उठाए जाने को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने की बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। पासवान ने यह भी बताया कि 20 जुलाई को होने वाली संसद रैली ऐतिहासिक होगी। उनके अनुसार, पेपर लीक, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने घोषणा की कि यह आंदोलन अब पूरे देश में और अधिक तीव्र होगा। एक छात्र ने विश्वास व्यक्त किया कि बड़ी संख्या में युवा सोनम वांगचुक के समर्थन में एकजुट होंगे। उसने वांगचुक को देश के जाने-माने वैज्ञानिक बताया जिन्होंने अपना जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया है। छात्र का कहना था कि युवा शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं से अत्यधिक परेशान हैं। सरकार समस्याओं से अवगत होने के बावजूद उनके समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिसके परिणामस्वरूप छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

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