आज मंगलवार को भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली थी। हालांकि अब यह सुनवाई टल गई है। दरअसल जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण मामला सूचीबद्ध नहीं हो सका है। बता दें कि शहर के करीब 62,500 प्रतिष्ठानों पर असर डालने वाले इस मामले में फैसले की उम्मीद थी। नगर निगम अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट और हलफनामा पहले ही कोर्ट में जमा कर चुका है जबकि रहवासी पक्ष ने कार्रवाई को अधूरा और भ्रामक बताते हुए अपने दस्तावेज पेश किए हैं।
दरअसल भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार का मामला पिछले कई हफ्तों से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहरभर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि व्यापारियों के विरोध के बाद यह अभियान रुक गया है। अब अगली सुनवाई की नई तारीख का इंतजार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई थी कार्रवाई
वहीं नगर निगम के अनुसार अब तक की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी गई है। जबकि दूसरी ओर याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि कई सील किए गए प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए और कार्रवाई वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं हुई। अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। शहर में सूचीबद्ध करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद तीन दिन तक सीलिंग अभियान चलाकर 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया।
सड़क पर उतर आए थे व्यापारी
दरअसल कार्रवाई शुरू होते ही शहर के व्यापारी विरोध में सड़क पर उतर आए थे। वहीं विरोध बढ़ने के बाद नगर निगम ने सीलिंग अभियान रोक दिया और पिछले करीब 15 दिनों से इस दिशा में कोई नई कार्रवाई नहीं हुई। रहवासी पक्ष का कहना है कि निगम की कार्रवाई सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश कर दावा किया है कि जिन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई दिखाई गई उनमें से कई दोबारा संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट और जमीन पर स्थिति में अंतर है। जबकि नगर निगम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की गई कार्रवाई का पूरा विवरण हलफनामे के साथ जमा किया जा चुका है। अब आगे की दिशा कोर्ट के अगले आदेश के बाद तय होगी।






