भडकाऊ बयान और हिंसक हमले भाजपा नेताओं की छटपटाहट के प्रतीक: ओझा

भडकाऊ बयान और हिंसक हमले भाजपा नेताओं की छटपटाहट के प्रतीक: ओझा

भोपाल। राजगढ़ घटना के बाद मध्य प्रदेश में सियासी भूचाल मचा हुआ है। भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जता रहे है और सरकारी अधिकारियों पर सरकार की गुलामी करने का आरोप लगा रहे है। भाजपा नेताओं के आरोपों और बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए निशाना साधा है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्षा शोभा ओझा ने नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा रतलाम में प्रशासनिक महिला अधिकारियों के विरुद्ध दिया गए भडक़ाऊ बयान और राजगढ़ में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा महिला अधिकारी पर किए गए हमले पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा नेताओं का इस तरह का व्यवहार यह बताता है कि भाजपा और उसके नेता, नियोजित तरीके से प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव डालकर अवैधानिक और गलत कामों को उनसे पूरा करवाना चाहते हैं। जिनकी पिछले 15 सालों में उनको आदत पड़ गई है, लेकिन अब कमलनाथ सरकार की सख्ती के चलते, उनकी मनमानी न चल पाने से उत्पन्न हताशा में वे बुरी तरह से छटपटा रहे हैं।
आगे शोभा ओझा ने कहा कि केवल गोपाल भार्गव ही नहीं, शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा आदि सभी नेता, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों व पुलिस पर दबाव डालकर, अपने उन गलत कामों को पूरा करवाने की कोशिश कर रहे हैं। जिनकी वजह से यह प्रदेश न केवल पूरे देश में बदनाम हुआ बल्कि यहां की तरक्की भी पूरी तरह से अवरुद्ध रही है। पूरे 15 वर्षों तक यह प्रदेश बीमारू बना रहा और इसकी तुलना बिहार और झारखंड से होती रही।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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