Tiger War: कमलनाथ का सिंधिया पर तंज- “कौन से टाइगर हैं महाराज”

Tiger War: कमलनाथ का सिंधिया पर तंज- “कौन से टाइगर हैं महाराज”

भोपाल

ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) द्वारा गुरुवार को भोपाल में पत्रकारों के सामने दिए गए बयान “टाइगर अभी जिंदा है” (tiger abhi zinda hai) पर राजनीति गरमा गई है । शुक्रवार को एक बार फिर सिंधिया ने बीजेपी की वर्चुअल रैली (bjp virtual rally) के दौरान यह दोहराया कि टाइगर अभी जिंदा है, हालांकि कई चीलें उन्हें नोचने के लिए घूम रही है। इसके बाद तो मानो सिंधिया (scindia) पर एक के बाद एक हमले शुरू हो गए हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (digvijay singh) ने कहा कि मैं और स्व. माधवराव सिंधिया ने पहले कई शेरों का शिकार किया है लेकिन अब केवल कैमरे से फोटो खींचते हैं। उसके बाद रतलाम (ratlam) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamalnath) ने कहा है कि टाइगर अगर जिंदा है तो यह टाइगर (tiger) है कौन सा ? यह पेपर का टाइगर है, जंगल का टाइगर है या फिर सर्कस का टाइगर है ? कमलनाथ ने उदाहरण देते हुए कहा कि घोड़े (horses) कई प्रकार के होते हैं एक घोड़ा शादी में जाता है सज कर और एक घोड़ा रेस का होता है । उसी प्रकार टाइगर भी कई प्रकार के होते हैं। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की राजनीति सिंधिया के टाइगर वाले बयान को लेकर लगातार सुर्खियों में है। सिंधिया का बचाव करते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने कहा कि दिग्विजय सिंह तो आदतन शिकारी हैं और उनकी शिकार करने की पुरानी आदत है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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