फेसबुक पर लाइव वीडियो देखने के लिए करनी होगी जेब ढीली, आ रहा है ये नया फीचर

फेसबुक पर लाइव वीडियो देखने के लिए करनी होगी जेब ढीली, आ रहा है ये नया फीचर

भोपाल

लॉकडॉउन (lockdown) के इस पीरियड में लोगों के लिए सोशल नेटवर्क (social network) का प्लेटफार्म सबसे बड़ा टाइम पास का एक साधन बन गया है। सोशन नेटवर्किंग साइट्स की बात करें तो यहां लोग बेहद आसानी से एक दूसरे से कनेक्ट हो जाते हैं। इसी के ही साथ अब इन पर वीडियो शेयरिंग और लाइव वीडियों का ट्रेंड काफी ज्यादा बढ़ गया है। लॉकडाउन के बाद से देखा गया है कि लोग फेसबुक लाइव (facebook live) वीडियो को बेहद पसंद कर रहे हैं। लेकिन अब आपको इस पसंद को बनाए रखने के लिए अपनी जेब थोडी ढीली करनी पड़ सकती है।

दरअसल कंपनी का लाइव वीडियो (video) को चार्जेबल करने के पीछे एक बेहद नेक मकसद है। हम सभी जानते हैं कि इस समय हम कोविड-19 जैसी भयावह महामारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में परफार्मिंग आट्रर्स और अन्य प्लेटफार्म जैसे डांसिग, म्यूजीशिंयस, पर्सनल ट्रेनर आदि प्रोफेशन से जुडे लोग कहीं परफार्म नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन वो फेसबुक के लाइव वीडियो सेशन के माध्यम से लोगों से जुड हुए हैं। इससे लोगों को मनोरंजन तो हो रहा पर परफार्मर्स को कोई फाइनेंनशियल फायदा नहीं हो रहा है। ऐसे में कंपनी इस नए फीचर को एड कर इन सभी लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाने का काम करेगी।

फेसबुक (facebook) पर जल्द ही यह नया फीचर एड हो जाएगा और जो लोग फेसबुक पर लाइव (live) करते हैं वो सभी नए फीचर की मदद से लाइव ब्रॉडकास्ट स्टार्ट करने से पहले यह तय कर सकेंगे कि वो अपना लाइव चार्जेबल करना चाहते हैं या इसे फ्री फॉर ऑल रखना चाहते हैं। इस तरह अब फेसबुक लाइव के जरिये भी लोग कमाई कर सकेंगे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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