सियासी घमासान के बीच प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ओढ़ी चुप्पी, कहा- नहाने जा रहा हूं, देखिये वीडियो

सियासी घमासान के बीच प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ओढ़ी चुप्पी, कहा- नहाने जा रहा हूं, देखिये वीडियो

भोपाल। मध्यप्रदेश में सियारी पारा हाई है। सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के सभी नेता सरकार बचाने की कवायद में जुटे हैं। लेकिन इसी बीच जब इस घमासान पर सिंधिया समर्थक माने जाने वाले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर से मीडिया ने बात करने की कोशिश की तो वो साफ बचते हुए नज़र आए। पत्रकारों के सवालों को बीच में छोड़कर भागने के लिये उन्होने बहाना भी बहुत अजीबोगरीब बनाया। जब पत्रकार उनसे हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया लेने पहुंचे तो लगभग भागते हुए उन्होने कहा कि वो नहाने जा रहे हैं और अभी कोई बात नहीं करेंगे। पत्रकार बार बार अपने सवाल दोहराते रहे और प्रद्युम्न सिंह बार बार नहाने जाने की बात कहते रहे।

इस बीच कई विधायक अपनी निष्ठा और समर्थन को लेकर खुलकर सामने आ रहे हैं। इंदौर से कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला ने कहा है कि कांग्रेस के सभी विधायक सच्चे सिपाही हैं और कोई बीजेपी के प्रभोलन में नहीं आ सकता। प्रत्येक विधायक का मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को सपोर्ट है। वहीं निर्दलीय विधायक विक्रम सिंह राणा ने कहा है कि जब तक कमलनाथ मुख्यमंत्री हैं मैं उनके साथ हूं। भोपाल पहुंचे राणा ने कहा कि सीएम ने आगर विधानसभा चुनाव को बैठक बुलाई है और वो उसमें शामिल होने यहां आए हैं, साथ ही उन्होने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मुख्यमंत्री कमलनाथ जहां कहेंगे मैं उनके साथ रहूंगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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