आज रात 12 बजे से भोपाल पूरी तरह बंद, सिर्फ दूध और दवाइयां मिलेंगी

आज रात 12 बजे से भोपाल पूरी तरह बंद, सिर्फ दूध और दवाइयां मिलेंगी

भोपाल| मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रशासन अलर्ट हो गया है| कलेक्टर ने भोपाल में लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए 5 अप्रैल रविवार रात 12 बजे से भोपाल को पूरी तरह लॉक डाउन करने के आदेश जारी कर दिए है ।

सोमवार से केवल दूध और दवाई की दुकानें ही खुली रहेंगी। किराने की दुकानें भी नहीं खोल सकेंगे। इस दौरान आम नागरिक को सिर्फ निकटम दूध और दवाई की दूकान तक अकेले जाने की अनुमति रहेगी। यह आदेश रविवार रात्रि 12:00 बजे से लागू होगा।

जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब भोपाल पूरी तरह से लॉक डाउन रहेगा। करोद मंड़ी भी 5 अप्रैल से आगामी आदेश तक बंद रहेगी। व्यापारी किसानों से सब्जी आदि खरीद कर नगर निगम के माध्यम से बिक्री करेंगे। किराना दुकान और अन्य दुकानों को दी गई छूट समाप्त कर दी गई है। आदेश में कहा गया है कि अधीकृत होम डिलीवरी के अतिरिक्त अन्य सभी दुकानें बंद रहेंगी। केवल दवाई दुकान ही खुली रहेंगी। होम डिलीवरी, दूध पार्लर और मेडिकल दुकानों इस दौरान खुले रहेंगे। शासकीय कार्य के लिए अति आवश्यक सेवा मे लगे हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट रहेगी। इस लॉक डाउन में मीडिया और उनके प्रतिनिधियों को भी पूर्व अनुसार छूट लागू रहेगी। लॉक डाउन में निजी वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। किसी भी क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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