भोपाल प्रशासन का तुगलकी फरमान, मैनिट प्रशासन हुआ परेशान

भोपाल प्रशासन का तुगलकी फरमान, मैनिट प्रशासन हुआ परेशान

भोपाल

देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थाओं में से एक माने जाने वाला मैनिट (MANIT) यानि मौलाना आजाद राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल में नया क्वारंटाइन सेन्टर (quarantine center) बनने जा रहा है। दरअसल जिला प्रशासन ने मेरिट प्रशासन से हॉस्टल नंबर 11 यानी अप्पू भवन को अधिग्रहित करने की कारवाई शुरू कर दी है और अब वहां कोरेन्टाइन सेन्टर बनाकर मरीजों को रखा जाएगा। हैरत की बात यह है कि मैनिट (MANIT) में हॉस्टल को क्वारंटाइन सेन्टर बनाया जा रहा है वहां एनआरआई (NRI) छात्र भी रहते हैं।

लॉकडाउन (lockdown) शुरू होने के पहले सभी होस्टल (hostel) खाली करा लिए गए थे लिहाजा सारे छात्र अपने-अपने राज्यों मे घर जा चुके हैं लेकिन उनका सामान उनके कमरों में बंद है। अब जब प्रशासन मैनिट प्रशासन (MANIT administration) से इन कमरों को खाली कराएगा तो जाहिर सी बात है कि छात्रों (students) का सामान भी बाहर निकाल कर कहीं और शिफ्ट किया जाएगा। मैनिट प्रशासन ने शासन के सामने यही दलील रखी थी कि ऐसे में यदि छात्रों का कोई उपयोगी डॉक्यूमेंट या सामान गायब हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा और छात्रों का तो जीवन ही खतरे में पड़ जाएगा। लेकिन प्रशासन ने एक न मानी और मैनिट प्रशासन पर दबाव डालकर इस होस्टल को अधिग्रहण करने की कार्रवाई शुरू कर दी। अब सवाल यह भी है कि अगर कोरोना लंबे समय तक चला और ऐसे में शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला हुआ तो फिर छात्र आकर रहेंगे कहां।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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