मप्र की सियासत में ‘शायरी’ का तड़का, कौन आया हमदर्द बनकर, रह गया राहज़न बनकर.?

मप्र की सियासत में ‘शायरी’ का तड़का, कौन आया हमदर्द बनकर, रह गया राहज़न बनकर.?

भोपाल|रविंद्र सिंह राजपूत| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस (Congress) की सरकार जाने के 100 दिन पूरे हो गए हैं| इस दौरान भाजपा (BJP) और कांग्रेस में जमकर वार पलटवार का दौर जारी रहा| अब प्रदेश की सियासत में ‘शायरी’ का तड़का लग गया है| मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi) के एक शायराना ट्वीट पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने शायराना अंदाज में ही पलटवार किया| इस पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) ने भी शायरी का तड़का लगाते हुए शायराना जवाब दिया| अब लोग इन शायरियों के अर्थ खोजने में जुटे हुए हैं| मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मची हलचल के बीच शिवराज का शायराना अंदाज चर्चा में है|

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम दिए संबोधन पर राहुल गाँधी ने ट्वीट किया| इस ट्वीट में उन्होंने लिखा ‘तू इधर उधर की न बात कर, ये बता कि क़ाफ़िला कैसे लुटा, मुझे रहज़नों से गिला तो है, पर तेरी रहबरी का सवाल है’। राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर शिवराज सिंह चौहान ने शायराना ट्वीट कर पलटवार किया| उन्होंने लिखा ‘यूं ही दिल खोलकर आप बात करें, कभी अपनों से भी सवाल करें। आपको रहज़नों से गिला है तो, ‘अपने यार रहज़नों’ से आप कुछ तो सवाल करें’।

‘हमदर्द बनकर आये, रह गये राहज़न बनकर’
शिवराज ने एक और ट्वीट कर लिखा ‘आये थे आप हमदर्द बनकर, रह गये केवल राहज़न बनकर। पल-पल राहज़नी की इस कदर आपने, कि आपकी यादें रह गईं दिलों में जख्म बनकर’। शिवराज के इस ट्वीट से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया, इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि ‘कौन हमदर्द है जो रह गये केवल राहज़न बनकर’|

कमलनाथ का पलटवार- रहजनों से आपने भी तो ख़ूब यारी निभायी
इस बीच पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी इसी अंदाज में शिवराज के ट्वीट पर पलटवार किया| उन्होंने लिखा ‘यार रहजनों से आपने भी तो ख़ूब यारी निभायी है, जा-जाकर उनके आगे खूब झोलियां फैलायी है, उनकी तारीफ़ों में भी जी भरकर क़सीदे गढ़े है , आज अपनो से सवाल की हिम्मत नहीं है आपमें, इसलिये क्या ख़ूब पलटी खायी है आपने’।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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