शर्मनाक : दो प्रोफेसरों में कपड़ा फाड़ लड़ाई, जमकर लात-घूंसे चले, वीडियो वायरल

शर्मनाक : दो प्रोफेसरों में कपड़ा फाड़ लड़ाई, जमकर लात-घूंसे चले, वीडियो वायरल

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| अपने आचरण से विद्यार्थी को जीवन निर्माण की प्रेरणा देने वाले शिक्षक जब अपने आचरण के विपरीत कार्य करे तो यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि उन छात्रों के लिए भी घातक होगा जो उन्हें अपना आदर्श मानकर उनके बताये मार्ग पर चलते हैं| ऐसा ही एक शर्मनाक मामला उज्जैन (Ujjain) से सामने आया, जहां विक्रम विश्वविद्यालय (Vikram University) के दो प्रोफ़ेसर आपस में भिड़ गए| दोनों के बीच जमकर लात घूसे चले| सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है|

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम को एमबीए डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रो. डीडी बेदिया और प्रोफेसर कामरान सुल्तान के बीच जमकर हाथापाई हुई। इस विवाद में इतनी मारपीट हुई कि दोनों घायल हो गए| कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। स्थानीय विधायक और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मामले में जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि डॉ कामरान एलएलएम करना चाहते हैं और उनकी क्लास का समय दिन में रहेगा| इस बात पर आपत्ति डॉ बेदी ने उठाई कि अगर दिन में कामरान एलएलएम पढ़ने जाएंगे तो डिपार्टमेंट की क्लास इससे प्रभावित होगी| इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हुई और विवाद हाथापाई तक पहुँच गया| हाथापाई में बेदिया के कपड़े फट गए, जबकि कामरान का चेहरा लहूलुहान हो गया। दोनों प्रोफेसरों के बीच हुए इस विवाद के बाद कुलपति डॉ. अखिलेश पांडेय ने जांच बैठा दी है| जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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