उमा भारती के भतीजे ने 3 लोगों को कुचल के मार दिया था, तब कहां गया था BJP का दलित प्रेम

उमा भारती के भतीजे ने 3 लोगों को कुचल के मार दिया था, तब कहां गया था BJP का दलित प्रेम

भोपाल।शिवराज सिंह चौहान बौखला गए है। बीजेपी नेता अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है। हर मुद्दों को तोड़ मरोड़ के समाज को बांटने की राजनीति कर रहे है। बीजेपी राजनीतिक मुद्दा बनाकर घटना को साम्प्रदायिक रूप देना चाहती है। ये शर्मनाक है कि पड़ोसी और परिवार झगड़े में दुःखद हादसा हुआ। बीजेपी ने अपनी गलत राजीतिक के चलते दलित का अपमान किया है। बीजेपी हमेशा से ही दलितों का अपमान करते हुए आई है। तब कहा गया था बीजेपी का दलित प्रेम। यह बातें आज कांग्रेस मीडिया अध्यक्ष शोभा ओझा और मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने सागर में दलित को जिंदा जलाने वाले मामले को लेकर संयुक्त पत्रकारवार्ता में कही।

वार्ता में सलूजा और ओझा ने आगे कहा कि बीजेपी नेत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी ने तीन दलित समाज के लोगो को कुचल के मार दिया था , तब उनका दलित प्रेम कहां गया था। बैरसिया में 64 वर्षीय बुजुर्ग को बीजेपी के मंडल अध्यक्ष ने जलाया था तब बीजेपी का दलित प्रेम कहां गया था।11 दिसंबर 1950 में बीजेपी ने संविधान और बाबा साहब का पुतला जलाया था तब उनका दलित प्रेम कहां गया था।बीजेपी को दलित समाज से माफी मांगना चाहिए।बीजेपी झूठ बोलकर घटना को सम्प्रदायक रूप देने में लगी है।

वार्ता में सलूजा और ओझा ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सागर घटना से पीड़ित परिवार की तुरंत सहायता की।सरकार ने मृतक के परिवार को नौकरी और एक मकान की मदद की है। सरकार ने मृतक परिवार के लिए 8 लाख 50 हजार की आर्थिक सहायता की है। शिवराज ओर बीजेपी ने सागर पीड़ित परिवार की क्या मदद की है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews