उमंग सिंघार का आरोप, “डबल इंजन सरकार” अब एक खोखला चुनावी जुमला, बैंक रिपोर्ट का हवाला देकर BJP पर कसा तंज

उमंग सिंघार ने कहा यह साफ बताता है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में मध्य प्रदेश कहीं नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्य प्रदेश ने भाजपा को 29 लोकसभा सांसद दिए, पिछले दो दशकों से सत्ता सौंपी फिर भी न बकाया पैसा मिला, न निवेश।
Umang Singhar

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मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार सहित केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर लिया है, उन्होंने कहा है कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के लिए “डबल इंजन सरकार” अब एक खोखला चुनावी जुमला साबित हो रहा है। सिंघार ने एक बैंक की रिपोर्ट के गवाले से भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है।

उमंग सिंघार ने X पर बैंक ऑफ़ बड़ौदा की रिपोर्ट को पोस्ट करते हुए लिखा है – भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से जहां कई राज्यों को उद्योग और निवेश के नए अवसर मिले, वहीं मध्य प्रदेश को फिर से नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा  बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल–दिसंबर 2025 के बीच देश में 26.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, लेकिन मध्य प्रदेश को “सिर्फ 3.2% हिस्सा” मिला। राजस्थान (4.3%) और छत्तीसगढ़ (3.9%) जैसे राज्यों को भी मध्य प्रदेश से अधिक निवेश मिला।

केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में मध्य प्रदेश कहीं नहीं

उमंग सिंघार ने कहा यह साफ बताता है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में मध्य प्रदेश कहीं नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्य प्रदेश ने भाजपा को 29 लोकसभा सांसद दिए, पिछले दो दशकों से सत्ता सौंपी फिर भी न बकाया पैसा मिला, न निवेश। यह न सिर्फ जनादेश का अपमान है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि भाजपा के सांसदों में अपने ही राज्य के लिए निवेश लाने का साहस और प्रभाव नहीं है।

विकास किसी चुनिंदा राज्यों की विशेषाधिकार नहीं

कांग्रेस नेता ने लिखा दूसरी ओर, राज्य सरकार निवेशक सम्मेलनों में 30.77 लाख करोड़ रुपये के दावे करती है, जबकि सच्चाई यह है कि इतना निवेश तो पूरे देश में भी पिछले नौ महीनों में नहीं आया। साफ है ये सम्मेलन सिर्फ पीआर स्टंट हैं, जमीन पर हकीकत कुछ और है। सिंघार ने कहा विकास किसी चुनिंदा राज्यों की विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश का भी हक है जिसने भाजपा को जनादेश दिया।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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