मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस की लगभग 10.99 करोड़ की खरीद जांच के घेरे में है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, आपस में जुड़ी चार फर्मों के जरिए फर्जी प्रतिस्पर्धा और तय मानकों के विपरीत उपकरणों की आपूर्ति के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में ईओडब्ल्यू ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिव्यांगजनों के अधिकारों और कल्याण के लिए बने विभाग में भी भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि इस भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है।
क्या है मामला
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक वर्ष 2024 में विभाग ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM के माध्यम से कंप्यूटर और अन्य आईटी उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया था। जांच में सामने आया कि बोली लगाने वाली चार फर्में अलग-अलग कंपनियों के रूप में सामने आईं, लेकिन उनके बीच कथित तौर पर आपसी संबंध थे। जांच में इन फर्मों के मोबाइल नंबर, ई-मेल और पते जैसी जानकारियों में समानताएं मिलने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार इन कंपनियों के पीछे तौर पर एक ही व्यक्ति का नियंत्रण था और अलग-अलग फर्मों के नाम से बोली लगाकर टेंडर प्रक्रिया में फर्जी प्रतिस्पर्धा तैयार की गई। मामले में साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, शांति ट्रेडर्स, एचटीएम इंडिया और सूरज इंटरप्राइजेज नाम की फर्मों का उल्लेख किया गया है। ईओडब्ल्यू ने रणधीर कुमार पटेल, हेमलता पटेल, अशोक कुमार सिंह और देवेंद्र सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जांच में उपकरणों की कीमत को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जिस यूपीएस की GeM पर कीमत करीब 3,754 बताई गई थी, उसे विभाग को 11,247 प्रति यूनिट की दर से सप्लाई किया गया। यानी दोनों कीमतों के बीच करीब तीन गुना का अंतर बताया गया है।
उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग का उद्देश्य दिव्यांगजनों को अधिकार, सहायता और सशक्तिकरण उपलब्ध कराना है, उसी विभाग की खरीद में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता सामने आना गंभीर विषय है। कांग्रेस नेता ने इसे दिव्यांगजनों के नाम पर कमीशनखोरी बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई और इस पूरे मामले में किस स्तर पर संरक्षण मिला है।
दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए बने विभाग में भी भ्रष्टाचार का खेल!
मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में ₹10.99 करोड़ के टेंडर में फर्जीवाड़े का खुलासा। 4 डमी फर्मों के जरिए टेंडर में खेल, ₹3,754 के UPS के लिए ₹11,247 का भुगतान, टेंडर से पहले ही…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 4, 2026






