केन-बेतवा विस्थापन पर सियासत, उमंग सिंघार ने MP सरकार पर आदिवासियों के साथ अन्याय का आरोप लगाया

उन्होंने कहा कि उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने के कारण प्रभावित परिवार भारी बारिश के बीच भी आंदोलन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
Umang Singhar

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के आंदोलन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासियों को न्याय देने की बजाय उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर कर रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारी बारिश के बीच भी प्रभावित परिवार अपने अधिकारों की मांग को लेकर “चिता आंदोलन” कर रहे हैं लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों का कहना है कि उन्हें दिया जा रहा 12.50 लाख रुपये का पुनर्वास पैकेज अपर्याप्त है और अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने सवाल किया कि जिन आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन छीनी जा रही है, उनकी आवाज सुनने के बजाय सरकार उन्हें आंदोलन करने पर क्यों मजबूर कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जवाब मांगते हुए कहा कि क्या यही डबल इंजन सरकार का आदिवासी सम्मान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर विस्थापन और फिर प्रभावित लोगों के अधिकारों की अनदेखी भाजपा सरकार का मॉडल बन चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।

जारी है आदिवासियों का आंदोलन

छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान मुआवजे तथा पुनर्वास की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच मध्यप्रदेश सरकार ने परियोजना प्रभावितों के लिए 202.5 करोड़ रुपये के अतिरिक्त पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे उनकी मूल मांगें पूरी नहीं होतीं और विस्थापन की चिंता भी दूर नहीं हुई है। भारी बारिश और नदी में बढ़ते जलस्तर के बावजूद प्रभावित आदिवासी महिला-पुरुष जल सत्याग्रह जारी रखे हुए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर पीने के पानी की आपूर्ति भी रोक दी, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को नदी का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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