जबलपुर की 1508 आंगनवाड़ी बिना स्थायी भवन के संचालित, उमंग सिंघार ने MP सरकार के विकास दावों पर उठाए सवाल

भवनों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Umang Singhar

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जबलपुर जिले की आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जबलपुर जिले की 2,493 आंगनवाड़ियों में लगभग 1.56 लाख बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से 1,508 आंगनवाड़ी केंद्रों के पास अपना स्थायी भवन नहीं है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में केंद्र किराए के कमरों, पंचायत भवनों, सामुदायिक भवनों या अन्य अस्थायी स्थानों से संचालित हो रहे हैं जहां बच्चों के लिए पर्याप्त जगह, सुरक्षित वातावरण और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने कहा है कि प्रदेश सरकार एक ओर “विकसित मध्यप्रदेश” का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर हजारों छोटे बच्चों को जुगाड़ की व्यवस्थाओं में शिक्षा और पोषण सेवाएं लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही विकसित मध्यप्रदेश की तस्वीर है, जहां नौनिहालों का भविष्य भी किराए के कमरों के भरोसे चल रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम नहीं हैं बल्कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण सेवाओं का भी प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में भवनों और मूलभूत सुविधाओं की कमी सीधे तौर पर इन सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

स्थायी भवन बनाने की मांग

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेशभर की सभी आंगनवाड़ियों के लिए स्थायी भवनों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। साथ ही पेयजल, शौचालय, बिजली, बैठने की समुचित व्यवस्था और बच्चों के अनुकूल सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि “बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

बता दें कि आंगनवाड़ी केंद्र एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के तहत संचालित किए जाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण तथा गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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