उमंग सिंघार ने कटनी में माइनिंग कॉन्क्लेव को लेकर सरकार को घेरा, कहा ‘भाजपा का खनिज उत्सव’

नेता प्रतिपक्ष ने आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून के उल्लंघन, बिना मुआवजे के विस्थापन, रेत माफिया, रॉयल्टी चोरी और डीएमए फंड के दुरुपयोग को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 साल में 40 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल खनन के लिए काटे गए और हजारों परिवार उजड़ने की कगार पर हैं।
Umang Singhar Opposition Leader

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने कटनी में हो रहे माइनिंग कॉन्क्लेव को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने पूछा कि यह कॉन्क्लेव किसके हित में हो रहा है..स्थानीय बेरोजगारों के लिए, प्रदेश के उद्योगपतियों के लिए या विदेशी कंपनियों को लीज देने के लिए?’ उन्होंने सरकार से मांग की कि वह पहले प्रदेश के डेढ़ हजार स्थानीय माइनिंग कारोबारियों के हितों पर ध्यान दे, इसके बाद ही बाहरी कंपनियों को लीज देने पर विचार करे।

नेता प्रतिपक्ष ने आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून के उल्लंघन का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं से बिना अनुमति लिए खनन गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के घर बिना उचित मुआवजे के उजाड़े जा रहे हैं लेकिन सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

रेत माफिया और रॉयल्टी चोरी का आरोप

उमंग सिंघार ने रेत माफिया के बढ़ते प्रभाव और रॉयल्टी चोरी का आरोप लगाया और बीजेपी को निशाने पर लिया। उन्होंने CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की 90 फीसदी रॉयल्टी की चोरी हो रही है। उन्होंने पूछा कि सरकार इस पर अंकुश क्यों नहीं लगा रही। क्या यह अवैध कमाई को बढ़ावा देने की साजिश है?

पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने की बात कही

कांग्रेस नेता ने SIYA के तहत दी गई 450 डीम्ड परमिशन पर सवाल उठाते हुए इसे पर्यावरण के साथ खुला मजाक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना बैठक के कंपनियों को परमिशन दी गई और हर कंपनी से 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा, पिछले 15 साल में 40 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल खनन के लिए काटे गए जिससे आदिवासी समुदाय विस्थापित हुए। सिंगरौली के मोरवा में 50 हजार से अधिक परिवारों के विस्थापन का खतरा है, जिसके लिए उन्होंने अडानी जैसे उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।

‘डीएमए फंड का दुरुपयोग’

उमंग सिंघार ने डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा है कि 10 साल में इस फंड में 13 हजार करोड़ रुपये आए, लेकिन खनन प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के विकास के लिए इसका उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि यह पैसा कहां खर्च हो रहा है और प्रभावित लोगों को मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि कटनी में हो रहा माइनिंग कॉन्क्लेव नहीं, बल्कि भाजपा का खनिज उत्सव है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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