उमंग सिंघार का आरोप “मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर”, जिला अस्पतालों में माइक्रोबायोलॉजी लैब नहीं होने पर उठाए सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में तैयार रिपोर्ट तीन साल तक दबाकर रखी गई और सरकार जनता के स्वास्थ्य की बजाय अपनी छवि बचाने में लगी है। इसी के साथ उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी सरकार को घेरा है।
Leader of the Opposition Umang Singhar

Umang Singhar

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट में हैं और सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के बजाय सिर्फ प्रचार-प्रसार में व्यस्त है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में प्रशिक्षित एमडी माइक्रोबायोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश अस्पतालों में माइक्रोबायोलॉजी लैब का अभाव है। इसके बावजूद मरीजों को बिना वैज्ञानिक जांच के रिजर्व श्रेणी की एंटीबायोटिक्स दी जा रही हैं। उनका कहना है कि इससे एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो रहा है और मरीजों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रहा है।

उमंग सिंघार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार ने पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को “वेंटिलेटर पर” पहुंचा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी जिला अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी लैब और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी मरीजों को बिना जांच के रिजर्व श्रेणी की एंटीबायोटिक्स दी जा रही हैं जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस संबंध में हुई रिपोर्ट तीन साल तक दबाकर रखी गई। उन्होंने पूछा, “आखिर किसकी नाकामी छिपाई जा रही थी? क्या भाजपा सरकार के लिए जनता की जान से ज्यादा अपनी छवि बचाना जरूरी है?” उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश के अस्पतालों में न डॉक्टर हैं, न विशेषज्ञ, न जरूरी सुविधाएं और आपकी सरकार सिर्फ प्रचार में व्यस्त है। उन्होंने सवाल किया कि स्वास्थ्य व्यवस्था की इस बदहाली की जिम्मेदारी कौन लेगा।

क्या है मामला

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश की क्वालिटी एश्योरेंस यूनिट द्वारा किए गए एक अध्ययन में सरकारी और निजी अस्पतालों में एंटीबायोटिक्स के उपयोग की स्थिति का आकलन किया गया। इस अध्ययन के तहत दो सरकारी और आठ निजी अस्पतालों के 864 मरीजों का सर्वे किया गया। अध्ययन में सामने आया कि प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में प्रशिक्षित एमडी माइक्रोबायोलॉजिस्ट नहीं हैं। सिर्फ दो जिलों में सीमित स्तर की माइक्रोबायोलॉजी लैब संचालित हो रही हैं, जहां एमडी पैथोलॉजी या एमएससी माइक्रोबायोलॉजी विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं। विशेषज्ञ लैब की कमी के कारण डॉक्टर कई मामलों में मरीजों के लक्षणों और अनुभव के आधार पर ही एंटीबायोटिक्स लिख रहे हैं। इससे रिजर्व और अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स का भी अधिक उपयोग हो रहा है, जिससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ने की आशंका जताई गई है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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