एमपी की पीएम पोषण योजना में अनियमितताओं के आरोप, उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा जवाब

उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों के पोषण के नाम पर चलने वाली योजना में भी भ्रष्टाचार होना बीजेपी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेता ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
Umang Singhar

मध्यप्रदेश में पीएम पोषण योजना में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्कूली बच्चों के पोषण से जुड़ी योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जांच में कई स्थानों पर रसोइयों के नाम और पते सही पाए गए, लेकिन उनका मानदेय दूसरे लोगों के बैंक खातों में भेजा जा रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि हर महीने करीब 14.8 करोड़ रुपये के भुगतान वाली योजना में इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर किसके संरक्षण में चल रही थी।

उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा जवाब

मध्यप्रदेश में स्कूली बच्चों के पोषण के लिए चल रही प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार का नया मामला बताते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि “मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में अब ‘पीएम पोषण योजना’ भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। जांच में सामने आया कि कई जगह रसोइयों के नाम सही हैं, लेकिन मानदेय किसी और के बैंक खातों में भेजा जा रहा था। हर महीने करीब 14.8 करोड़ का भुगतान होने वाली योजना में इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर किसके संरक्षण में चल रही थी?”

कांग्रेस नेता ने कहा कि ऑडिट के बाद सरकार ने 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के लिए e-KYC के निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन अब तक गलत खातों में गए करोड़ों रुपये के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसका जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूछा कि गरीब बच्चों के पोषण से जुड़ी योजना में हुई इस अनियमितता के लिए जिम्मेदार कौन है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

क्या है मामला

मध्यप्रदेश में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने वाली पीएम पोषण योजना के ऑडिट में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य पीएम पोषण सेल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा में 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के रिकॉर्ड में नाम और पते सही मिले, लेकिन उनसे जुड़े बैंक खाते दूसरे व्यक्तियों के दर्ज पाए गए। यह विसंगति बैंक खातों और समग्र आईडी के मिलान के दौरान सामने आई। इसके बाद राज्य सरकार ने सभी रसोइयों और सहायकों का e-KYC, समग्र आईडी और बैंक खातों का सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। मामले में सत्यापन पूरा होने के बाद ही मानदेय जारी किया जाएगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews