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उमंग सिंघार ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, MP में पेसा मोबिलाइजरों की सेवा बहाल करने की मांग

पेसा कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सक्रिय बनाने में जुटे मोबिलाइजरों की सेवा समाप्ति का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस नेता ने सरकार से इनकी बहाली के साथ पेसा व्यवस्था के जमीनी क्रियान्वयन को बनाए रखने की मांग भी की है।
Leader of the Opposition Umang Singhar

Umang Singhar

मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के लगभग 5,200 पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं समाप्त किए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं तत्काल बहाल करने और उनके रोजगार की निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग की है।

कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में कहा कि पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त होने से उनके परिवार के सामने रोजगार और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि इसका असर सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि पेसा कानून के जमीनी क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगभग 5,200 पेसा मोबिलाइजर ग्राम स्तर पर काम करते रहे हैं। इनकी भूमिका ग्राम सभाओं को सक्रिय करने, ग्रामीणों को पेसा कानून की जानकारी देने और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करने में महत्वपूर्ण रही है।

अपने पत्र में यह उल्लेख भी किया कि उन्होंने 20 मई 2026 को भी पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं जारी रखने को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बावजूद सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पेसा मोबिलाइजर अपनी सेवा बहाली की मांग को लेकर भोपाल में आंदोलनरत हैं और सरकार को उनकी मांगें सुननी चाहिए।

सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से प्रकरण की शासन स्तर पर समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि लगभग 5,200 पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं पुनः प्रारंभ की जानी चाहिए और उनके रोजगार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए।

क्या है पेसा कानून और पेसा मोबिलाइजर्स की भूमिका

पेसा यानी पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को स्थानीय शासन में अधिक अधिकार और भागीदारी देने वाला कानून है। इसका उद्देश्य संविधान की पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देकर स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

मध्यप्रदेश में पेसा कानून को लागू करने के लिए ग्राम सभाओं को सक्रिय करने, ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को उनके अधिकारों एवं कानून की जानकारी देने तथा सरकारी योजनाओं और ग्राम सभा की गतिविधियों के बीच समन्वय बनाने में पेसा मोबिलाइजरों-प्रेरकों की भूमिका रही है। ये ग्राम स्तर पर पेसा व्यवस्था और स्थानीय समुदाय के बीच संपर्क का काम करते हैं।

मध्यप्रदेश में पेसा नियम 2022 में लागू हुआ था। इसके बाद अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूत करने और पेसा के प्रावधानों को जमीन पर लागू करने पर जोर दिया गया। ऐसे में पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त किए जाने का मुद्दा रोजगार के साथ-साथ पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्राम सभाओं की सक्रियता से भी जुड़ गया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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