वीडी शर्मा का खुलासा, चौथी बार सत्ता में क्यों नहीं आ पाई बीजेपी

वीडी शर्मा का खुलासा, चौथी बार सत्ता में क्यों नहीं आ पाई बीजेपी

भोपाल। अपनी तेजतर्रार कार्यशैली, ईमानदार और स्वच्छ छवि के चलते बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ( Bjp President) पद पर पहुंचे विष्णुदत्त शर्मा (Vishnu dutt sharma) ने स्वीकार किया है कि 2018 के विधानसभा चुनाव (Vidhansabha election) में पार्टी की पराजय का एक बड़ा कारण टिकट वितरण में हुई भूल थी। विष्णु ने कहा कि हार की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि यदि कुछ चेहरे बदल दिए जाते तो शायद परिणाम कुछ और होते। हालांकि वोटों का प्रतिशत फिर भी बीजेपी का ही ज्यादा था।

एक अखबार के साथ दिए साक्षात्कार में विष्णु दत्त ने यह भी कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश ( Madhya pradesh) में संवैधानिक संकट के हालात हैं क्योंकि मंत्री तक यह कह रहे हैं कि कमलनाथ सरकार ( Kamalnath Government) में अधिकारियों की किचन केबिनेट है और सारे के सारे फैसले वही ले रहे हैं। कैबिनेट का कोई अस्तित्व नहीं है ।सिंधिया (Scindia) जैसे कद्दावर नेता को सड़कों पर उतरने की बात कहनी पड़ रही है। वीडी शर्मा ने इस सवाल का जवाब पूछे जाने पर कि जौरा और आगर- मालवा के उपचुनाव (by election) उनके लिए अग्निपरीक्षा होंगे, कहा पार्टी पूरी तरह तैयार है और इन दोनों उप चुनावों में जीत हमारी ही होगी । पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सामन्जस्य के सवाल पर वीडी शर्मा ने कहा कि हमारे सभी बड़े नेताओं का अपने अपने क्षेत्र में व्यापक प्रभाव है और उन सभी के साथ पार्टी को एक सूत्र में पिरोना उनकी प्राथमिकता होगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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