क्‍या राजगढ मजार पर राहुल गांधी की अनुमति से लगा था उर्स मेला : रामेश्वर शर्मा

क्‍या राजगढ मजार पर राहुल गांधी की अनुमति से लगा था उर्स मेला : रामेश्वर शर्मा

भोपाल| कोरोना संकट के बीच प्रदेश में वार पलटवार का दौर भी जारी है| विधायक एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्‍यक्ष रामेश्‍वर शर्मा ने पूर्व मंत्री पी सी शर्मा के बयान पर पलटवार करते हुये जोरदार हमला बोला है। विधायक रामेश्‍वर ने कहा कि कमलनाथ जी रोज नये झूठ बोलते है यदि मुख्‍यमंत्री रहते उन्‍होने कुछ किया होता तो आज प्रदेश कोरोना संक्रमण से नहीं जूझ रहा होता।

बीजेपी विधायक ने कहा कि सम्‍पूर्ण भारत वर्ष में हर्षोलास से मनाये जाने वाला पर्व होली को पूरे देश ने 10 मार्च को अपने अपने घरों मे रहकर मनाया। लेकिन 10 से 18 मार्च को राजगढ की मजार पर उर्स मेले का आयोजन किया गया। जिसमें पूरे देश भर के लाखों जमाती शामिल हुये। राजगढ की मजार पर उर्स मेले का आयोजन किसकी अनुमति से किया गया। क्‍या राहुल गॉधी ने उर्स मेले के लिये विशेष अनुमति देने का निर्देश कमलनाथ जी को दिया था । कमलनाथ जी की यह सोच जमातीयों से बिल्‍कुल मिलती जुलती है जो कहते है कि वह अल्‍लाह के बंदे है उन्‍हे कोरोना नहीं होगा।

…तो स्‍वास्‍थय कर्मीयो पर ईट नहीं गोलियां चलती
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर बड़ा हमला बोलते हुए रामेश्‍वर शर्मा ने कहा कि मध्‍यप्रदेशवासीयों पर बाबा महाकाल की कृपा है, कि समय रहते कांग्रेस सरकार चली गयी नही तो इन्‍दौर में स्वास्थ्य कर्मीयों पर ईटे नही गोलियां चलती ओर कार्यवाही की जगह दिग्विजय सिंह उन्हें अपने हाथो से बिरयानी खिलाने जाते।

तबादले कर सकते थे पर कोरोना को लेकर बैठक नही
विधायक ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर कमलनाथ जी कितने गंभीर थे उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्‍होने प्राइवेट छोडिये शासकीय अस्‍पतालों में कोरोना अलर्ट नही किया । तुलसी सिलावट ने 10 मार्च को इस्‍तीफा दिया 14 मार्च को स्‍वीकार कर लिया गया इस दौरान स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के तबादले किसने किये ? तबादले कर सकते थे पर कोरोना को लेकर बैठक नही क्‍या यह हास्‍यास्‍पद नही?

घर बैठकर रामायण देखें कांग्रेसी आएगी सद्बुद्धि
विधायक रामेश्‍वर शर्मा ने कहा कि प्रदेश एवं देश कोरोना संकट से गुजर रहा है। इस संकट की घडी में यदि काग्रेंस नेता पीडित मानवता की मदद नही कर सकते तो कम से कम घर बैठकर रामायण का प्रसारण देखे । शायद सद्बुद्धि आ जाये ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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