मुख्यमंत्री पद को लेकर क्या बोल गए गोपाल

मुख्यमंत्री पद को लेकर क्या बोल गए गोपाल

भोपाल। मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की दबी हुई महत्वाकांक्षा सामने आई है। सागर की रहली में लोगों को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में हमारी सीटें कुछ ही कम रह गई ,चार विधायक और आ जाते तो मुख्यमंत्री आपके इलाके का ही होता। उसके बाद संभलते हुए गोपाल बोले कि या जिसे पार्टी जिसे तय करती । 1985 से विधानसभा में लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे गोपाल का यह बयान बीजेपी में चल रही नेतृत्व की दौड़ का एक जीता जागता उदाहरण है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान के लंबे मुख्यमंत्री काल के पास जब बीजेपी विपक्ष में आई तो शिवराज सिंह चौहान को चुनौती देने के लिए गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गी ,राकेश सिंह और नरोत्तम मिश्रा जैसे लंबे समय से प्रभावशाली राजनीति कर रहे नेता सक्रिय हो गए। यही कारण है कि आज बीजेपी उतनी एकजुट नजर नहीं आती जितनी सत्ता में रहते हुए थी और पार्टी की इसी खराब हालत का लाभ उठाते हुए कांग्रेस विपरीत परिस्थितियों के बाद भी धीरे-धीरे सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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