सरकार का स्कूली बच्चों के साथ यह कैसा मजाक

election-commission-can-be-banned-on-Former-CM-Shivraj-for-campaigning-

भोपाल।

मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में भी इस समय लॉक डाउन (lock down के चलते स्कूलों की पढ़ाई बंद है और इसके चलते स्कूल (school) भी बंद है। इसी बीच प्राइवेट (private) स्कूलों के द्वारा पढ़ने वाले बच्चों के पालकों पर फीस (fees) के लिए दबाव बनाया जा रहा है ।खबर सरकार तक पहुंची और रविवार (sunday) को मुख्यमंत्री chief minister शिवराज सिंह (shivraj singh) ने आदेश दिए कि बच्चों से लॉक डॉऊन के पीरियड के दौरान फीस न ली जाए। इसी के संबंध में अब स्कूली शिक्षा विभाग (school education department ने एक सर्कुलर जारी किया है ।

इस सर्कुलर में लिखा है कि लॉक डाउन पीरियड के दौरान कोई भी प्राइवेट स्कूल बच्चों से ट्यूशन फीस के अलावा किसी अन्य प्रकार की फीस ना ले। हैरत की बात यह है कि स्कूल की फीस में सबसे बड़ा हिस्सा ही ट्यूशन फीस का होता है जो कुल फीस का लगभग 80 से 90 फ़ीसदी होता है। उदाहरण के लिए हम आप को समझाते हैं। दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) कोलार रोड भोपाल की कक्षा 10 के लिए ट्यूशन फीस कुल 24000 रू 3 माह के लिए है ।यदि बच्चा बस से जाता है तो उसे 7000 रू 3 माह के लिए अतिरिक्त और अगर वह मैस का उपयोग करता है तो 5000 रू 3 माह के लिए अतिरिक्त लिए जाते हैं।

इसके अलावा वहां कोई अन्य फीस नहीं ली जाती यानी भोजन या बस का उपयोग तो होना है ही नहीं ।बची ट्यूशन फीस ,तो वह पूरी की पूरी ली जाएगी। ऐसे में फिर मुख्यमंत्री(cheif minister) की घोषणा का क्या फायदा ।सर्कुलर जारी करने वाले स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) के अधिकारियों का तर्क है कि क्योंकि प्राईवेट स्कूलो(Private schools) को शिक्षकों को वेतन देना पड़ेगा और भवन का किराया आदि भी, इसलिए यह ट्यूशन फीस जरूरी है। लेकिन सवाल यहां यह भी खड़ा होता है आखिरकार इसमें बच्चों का क्या दोष कि वे बिना स्कूल गये पढे ट्यूशन फीस अदा करें।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews